देश Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/category/national/ News website Mon, 20 Jul 2026 12:40:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://aajkhabar.in/wp-content/uploads/2026/03/cropped-cropped-aajkhabar-Logo04-32x32.png देश Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/category/national/ 32 32 542 करोड़ की परियोजनाओं के लोकार्पण के बीच सीएम योगी का बड़ा राजनीतिक संदेश, सनातन और विकास को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना https://aajkhabar.in/amid-the-inauguration-of-projects-worth-542-crore-cm-yogi-delivers-a-strong-political-message-targeting-the-op/ https://aajkhabar.in/amid-the-inauguration-of-projects-worth-542-crore-cm-yogi-delivers-a-strong-political-message-targeting-the-op/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:40:00 +0000 https://aajkhabar.in/amid-the-inauguration-of-projects-worth-542-crore-cm-yogi-delivers-a-strong-political-message-targeting-the-op/ नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सोमवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के...

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नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सोमवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ-साथ विपक्ष पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। 542 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 82 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सनातन, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी सरकार की नीतियों का उल्लेख किया और समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन परंपरा देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का आधार है। उन्होंने कहा कि जब तक सनातन सुरक्षित रहेगा, तब तक समाज और राष्ट्र भी सुरक्षित रहेंगे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि सनातन पर किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न होता है तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा। अपने भाषण में उन्होंने विपक्षी दलों पर सनातन विरोधी राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास की उपेक्षा की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने आस्था स्थलों के विकास, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने महादेवा स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर और अयोध्या सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर कराए जा रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।

अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में महिलाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा और उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है। उन्होंने रक्षा उत्पादन, औद्योगिक विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश को निवेश और रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए कई योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश के प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी बाबू केडी सिंह की विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी ऐतिहासिक हवेली के संरक्षण के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाएगी ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा ले सकें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस धरोहर को संरक्षित रखते हुए खेल और सांस्कृतिक विरासत दोनों को सम्मान देने का प्रयास किया जाएगा।

बाराबंकी में आयोजित इस कार्यक्रम ने विकास और राजनीति दोनों को एक साथ केंद्र में ला दिया। एक ओर सरकार ने विभिन्न विकास परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान भी चर्चा का विषय बने। आगामी समय में इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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बांग्लादेश में बढ़ता बाल श्रम बना गंभीर सामाजिक चुनौती, शोषण और कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता https://aajkhabar.in/rising-child-labor-in-bangladesh-has-become-a-serious-social-challenge-increasing-cases-of-exploitation-and-wo/ https://aajkhabar.in/rising-child-labor-in-bangladesh-has-become-a-serious-social-challenge-increasing-cases-of-exploitation-and-wo/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:34:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/rising-child-labor-in-bangladesh-has-become-a-serious-social-challenge-increasing-cases-of-exploitation-and-wo/ नई दिल्ली । बांग्लादेश में बाल श्रम और उससे जुड़े शोषण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी...

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नई दिल्ली । बांग्लादेश में बाल श्रम और उससे जुड़े शोषण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। हाल ही में सामने आए सरकारी हेल्पलाइन आंकड़ों और विभिन्न सामाजिक अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि बड़ी संख्या में बच्चे आज भी असुरक्षित कार्यस्थलों पर कठिन परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। बच्चों के अधिकारों से जुड़े संगठनों का कहना है कि आर्थिक चुनौतियों और प्रभावी निगरानी की कमी के कारण स्थिति पहले की तुलना में अधिक गंभीर होती जा रही है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से 10 जून के बीच सरकारी चाइल्ड सपोर्ट हेल्पलाइन 1098 पर बच्चों के शोषण से संबंधित 101 शिकायतें दर्ज की गईं। वहीं आपातकालीन हेल्पलाइन 999 पर मई तक कार्यस्थलों पर बाल श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार और शोषण से जुड़ी 33 शिकायतें प्राप्त हुईं। इन मामलों ने बाल सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थलों की निगरानी को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

राजधानी ढाका में घरेलू काम करने वाले बच्चों पर किए गए एक सर्वे में सामने आया कि लगभग आधे बच्चों को किसी न किसी प्रकार के शोषण का सामना करना पड़ता है। वहीं बड़ी संख्या में बच्चों पर अत्यधिक काम का बोझ भी पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कार्यों में लगे बच्चों की स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ऐसे कार्यस्थलों की नियमित निगरानी करना कठिन होता है।

बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि होटल, रेस्तरां, परिवहन, ईंट भट्टों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत बच्चों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। कई मामलों में उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ बच्चों को निर्धारित मेहनताना भी नहीं मिल पाता। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

सामाजिक संगठनों का यह भी कहना है कि बाल श्रमिकों को अक्सर इसलिए काम पर रखा जाता है क्योंकि उन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की स्थिति में नहीं होते। असंगठित क्षेत्रों में निगरानी की सीमित व्यवस्था के कारण ऐसे मामलों का समय पर पता लगाना और प्रभावी कार्रवाई करना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

घरेलू कामगारों के अधिकारों के लिए कार्यरत संगठनों ने भी बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के अनेक मामलों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वर्षों से स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है और आज भी कम उम्र के बच्चे घरेलू कार्यों में लगे हुए शोषण का सामना कर रहे हैं। कई मामलों में मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में बांग्लादेश में बाल श्रम करने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 की तुलना में अब अधिक बच्चे कार्यबल का हिस्सा बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ती महंगाई और पारिवारिक आय में कमी के कारण अनेक बच्चों को पढ़ाई छोड़कर रोजगार की ओर जाना पड़ रहा है।

बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि बाल श्रम की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा तक आसान पहुंच, गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार और असंगठित क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। उनका मानना है कि सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों के संयुक्त प्रयासों से ही बच्चों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराया जा सकता है।

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क्वाड मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले अमेरिका का बड़ा संदेश, हिंद-प्रशांत में भारत समेत साझेदार देशों की भूमिका को बताया रणनीतिक रूप से अहम https://aajkhabar.in/major-message-from-the-us-ahead-of-the-quad-ministerial-meeting-highlights-the-strategically-important-role-of/ https://aajkhabar.in/major-message-from-the-us-ahead-of-the-quad-ministerial-meeting-highlights-the-strategically-important-role-of/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:25:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/major-message-from-the-us-ahead-of-the-quad-ministerial-meeting-highlights-the-strategically-important-role-of/ नई दिल्ली । फिलीपींस में आयोजित होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले...

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नई दिल्ली । फिलीपींस में आयोजित होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत सहित अपने रणनीतिक साझेदार देशों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका एक स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा इस उद्देश्य की प्राप्ति में क्वाड देशों की साझेदारी निर्णायक महत्व रखती है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री स्थिरता से जुड़े मुद्दे वैश्विक स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो फिलीपींस में आयोजित आसियान से जुड़ी विभिन्न बैठकों और क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए रवाना हो चुके हैं। उनके दौरे के दौरान आसियान पोस्ट-मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस, ईस्ट एशिया समिट विदेश मंत्रियों की बैठक और आसियान रीजनल फोरम की बैठकों में भी हिस्सा लेने का कार्यक्रम है। इस दौरान उनकी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताएं भी प्रस्तावित हैं।

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करना, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना तथा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़े साझा प्रयासों को आगे बढ़ाना है। अमेरिका ने दोहराया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सभी देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना उसकी प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताओं में शामिल है।

क्वाड समूह भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मंच है। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, आर्थिक सहयोग, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर मिलकर काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में क्वाड की गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ा है और इसे क्षेत्रीय सहयोग के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में चारों देशों ने स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। साथ ही सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने तथा ऐसी साझा पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी, जिनका लाभ हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को सीधे तौर पर मिल सके। बैठक में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया था।

पिछली बैठक के संयुक्त वक्तव्य में पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई थी। सदस्य देशों ने किसी भी ऐसे एकतरफा कदम का विरोध दोहराया था, जो बल प्रयोग, दबाव या सैन्य गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्रभावित करता हो। साथ ही नौवहन की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही की सुरक्षा और समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

फिलीपींस में होने वाली इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, सामरिक सहयोग, समुद्री चुनौतियों और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। भारत सहित सभी सदस्य देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, संतुलन और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में साझा रणनीति पर आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे।

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त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप सुसाइड की आशंका जांच में जुटीं एजेंसियां https://aajkhabar.in/tripura-dgp-anurag-dhankhar-ips-officer-police-investigation-india-news/ https://aajkhabar.in/tripura-dgp-anurag-dhankhar-ips-officer-police-investigation-india-news/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:18:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/tripura-dgp-anurag-dhankhar-ips-officer-police-investigation-india-news/ उत्तर प्रदेश । यूपी के बागपत जिले के मूल निवासी और त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक...

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उत्तर प्रदेश । यूपी के बागपत जिले के मूल निवासी और त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया है। सोमवार सुबह उनका शव अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में मिला। अधिकारियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है हालांकि पुलिस और फॉरेंसिक टीम हर पहलू की गहन जांच कर रही है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक मौत के वास्तविक कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

अनुराग धनखड़ 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी थे। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी पहचान एक सख्त और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में रही। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की जांच में भी उनकी अहम भूमिका रही थी जिसके कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे।

उनकी अचानक मौत की खबर सामने आते ही पुलिस विभाग और प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। घटनास्थल को सुरक्षित कर पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल से मिले सभी तथ्यों और परिस्थितियों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके।

अनुराग धनखड़ उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। ग्रामीणों के अनुसार वे करीब पच्चीस वर्ष पहले आखिरी बार अपने पैतृक गांव आए थे। गांव में उनका पुश्तैनी मकान आज भी मौजूद है लेकिन लंबे समय से बंद पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार के सदस्य अब गांव में नहीं रहते।

उनका शुरुआती जीवन बेहद सामान्य माहौल में बीता। उन्होंने गांव के प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चले गए। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। मेहनत और ईमानदारी के दम पर उन्होंने पुलिस सेवा में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और अंततः त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक बने।

परिवार में उनकी पत्नी कल्पना और बेटा अभिषेक हैं। अभिषेक वर्तमान में कनाडा में रहते हैं। उनके दो भाई भी हैं जिनमें एक बड़ौत में व्यवसाय करते हैं जबकि दूसरे वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद निजी क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं।

उनके बचपन के मित्रों ने उन्हें अनुशासित मेहनती और खेलों में रुचि रखने वाला व्यक्ति बताया। उनके साथ पढ़ने वाले साथियों के अनुसार वे वॉलीबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे और हमेशा नेतृत्व की क्षमता दिखाते थे। यही गुण आगे चलकर उनके प्रशासनिक जीवन में भी दिखाई दिए।

फिलहाल पुलिस मुख्यालय में हुई इस घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जांच एजेंसियां हर पहलू की निष्पक्ष जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच पुलिस विभाग ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पूरे मामले की पारदर्शी जांच का भरोसा दिलाया है। देश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में गिने जाने वाले अनुराग धनखड़ का अचानक इस तरह दुनिया से चले जाना प्रशासनिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

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भारत-मोल्दोवा संबंधों में ऐतिहासिक अध्याय, राष्ट्रपति मुर्मु और माइया सैंडू की मुलाकात में व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा सहयोग पर बनी सहमति https://aajkhabar.in/a-historic-chapter-in-india-moldova-relations-consensus-reached-on-cooperation-in-trade-agriculture-health-and/ https://aajkhabar.in/a-historic-chapter-in-india-moldova-relations-consensus-reached-on-cooperation-in-trade-agriculture-health-and/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:18:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/a-historic-chapter-in-india-moldova-relations-consensus-reached-on-cooperation-in-trade-agriculture-health-and/ नई दिल्ली ।भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने तीन देशों के राजकीय दौरे के...

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नई दिल्ली ।भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने तीन देशों के राजकीय दौरे के पहले चरण में मोल्दोवा की राजधानी चिसीनाउ पहुंचकर वहां की राष्ट्रपति माइया सैंडू से शिखर वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में भारत और मोल्दोवा के द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।

चिसीनाउ स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मु का औपचारिक स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया और दोनों देशों के राष्ट्रीय सम्मान के अनुरूप राजकीय समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रपति माइया सैंडू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और विश्वास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और मोल्दोवा के बीच राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों पर व्यापक चर्चा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मौजूदा सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ नई साझेदारियों की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। वार्ता में आपसी हितों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा प्रयासों पर भी जोर दिया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का यह पहला राजकीय दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा भारत और मोल्दोवा के बीच बढ़ते विश्वास, मित्रता और दीर्घकालिक सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और साझा विकास की भावना को भविष्य की साझेदारी का मजबूत आधार बताया।

इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इसके अलावा वह मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ संवाद करेंगी। यात्रा कार्यक्रम में व्यापारिक समुदाय के साथ बिजनेस फोरम को संबोधित करने और मोल्दोवा में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात भी शामिल है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।

भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत यूरोप के देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है और मोल्दोवा के साथ यह संवाद उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अपने तीन देशों के दौरे के पहले चरण में मोल्दोवा पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई गति देने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में इस दौरे के परिणाम व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में दिखाई देने की उम्मीद जताई जा रही है।

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महोबा में एसडीएम और अधिवक्ता विवाद ने पकड़ा तूल कलेक्ट्रेट में वकीलों का प्रदर्शन कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट बहिष्कार की चेतावनी https://aajkhabar.in/mahoba-news-sdm-controversy-advocate-protest-uttar-pradesh-news-district-administration/ https://aajkhabar.in/mahoba-news-sdm-controversy-advocate-protest-uttar-pradesh-news-district-administration/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:16:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/mahoba-news-sdm-controversy-advocate-protest-uttar-pradesh-news-district-administration/ महोबा । उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच विवाद ने...

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महोबा । उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सदर एसडीएम पर एक अधिवक्ता से फोन पर अभद्र व्यवहार करने तथा कथित रूप से उन्हें कोर्ट में न आने और वकालत का लाइसेंस रद्द कराने की धमकी देने के आरोपों के बाद जिला मुख्यालय का माहौल गरमा गया। मामले के विरोध में जिला अधिवक्ता समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई।

विवाद की शुरुआत बीजानगर निवासी अधिवक्ता परशुराम कुशवाहा के रास्ते से जुड़े विवाद से हुई। अधिवक्ता का आरोप है कि समस्या का समाधान कराने के बजाय सदर एसडीएम ने उनसे फोन पर अनुचित भाषा का प्रयोग किया और कथित तौर पर गंभीर धमकियां दीं। उनका कहना है कि उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई थी जिसके बाद उनके साथ यह व्यवहार किया गया। अधिवक्ता ने दावा किया है कि बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है और इसी आधार पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

घटना के बाद जिला अधिवक्ता समिति ने इसे अधिवक्ताओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि अधिवक्ताओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा तो न्यायिक व्यवस्था की गरिमा प्रभावित होगी। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अधिवक्ता समिति के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि पीड़ित अधिवक्ता की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ और आरोपों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे एसडीएम न्यायालय का पूर्ण बहिष्कार करने के साथ व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं को दबाव में लेने या डराने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला अधिकारी ने अधिवक्ताओं से मुलाकात कर उनका ज्ञापन प्राप्त किया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और तहसील स्तर पर लंबित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जिले में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों पक्ष अपने अपने रुख पर कायम हैं। एक ओर अधिवक्ता संगठन कार्रवाई की मांग पर अड़ा है तो दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं क्योंकि यही तय करेगी कि यह विवाद जल्द सुलझेगा या आगे और गहराएगा।

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सपा के प्रदर्शन पर सियासी संग्राम डिंपल यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने रोका यूपी से दिल्ली तक हंगामा https://aajkhabar.in/samajwadiparty-dimpleyadav-delhipolice-protest-uttarpradesh/ https://aajkhabar.in/samajwadiparty-dimpleyadav-delhipolice-protest-uttarpradesh/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:14:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/samajwadiparty-dimpleyadav-delhipolice-protest-uttarpradesh/ उत्तर प्रदेश । दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सोमवार को समाजवादी पार्टी के विरोध प्रदर्शन...

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उत्तर प्रदेश । दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सोमवार को समाजवादी पार्टी के विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। पार्टी ने दावा किया कि सांसद डिंपल यादव इकरा हसन प्रिया सरोज और रुचि वीरा समेत कई सांसदों को संसद से जंतर मंतर तक निकाले जा रहे पैदल मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने रोककर कुछ समय के लिए हिरासत में रखा। बाद में सभी सांसदों को छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद सपा ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी के अनुसार सांसद छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शन के समर्थन में संसद से जंतर मंतर तक मार्च निकाल रहे थे। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने बीच रास्ते में सभी को रोक लिया और करीब दो घंटे तक पार्लियामेंट थाना परिसर में बैठाए रखा। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने दावा किया कि सभी सांसदों को बाद में बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधियों को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और छात्रों की आवाज दबाना उचित नहीं है।

उधर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। राजधानी लखनऊ में विधानसभा की ओर बढ़ रहे सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। विरोध स्वरूप कई कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाकर वाहनों के माध्यम से निर्धारित स्थान पर पहुंचाया। वाराणसी में भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का मुक्की और तीखी बहस देखने को मिली।

बीएचयू और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भी कुछ छात्र समूहों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारे लगाए और अपनी मांगों के समर्थन में पोस्टर लेकर मार्च निकाला। कुछ विदेशी छात्र भी प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए।

इस बीच डिंपल यादव ने मीडिया से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत आवश्यक कदम उठाए गए।

फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बता रहा है वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद, बैंकिंग शेयर रहे सबसे कमजोर https://aajkhabar.in/impact-of-global-geopolitical-tensions-on-the-indian-market-sensex-plunged-443-points-nifty-also-closed-lower/ https://aajkhabar.in/impact-of-global-geopolitical-tensions-on-the-indian-market-sensex-plunged-443-points-nifty-also-closed-lower/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:12:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/impact-of-global-geopolitical-tensions-on-the-indian-market-sensex-plunged-443-points-nifty-also-closed-lower/ नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को...

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नई दिल्ली ।
वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,708.52 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 24,238.50 अंक पर आ गया। इसके साथ ही सेंसेक्स एक बार फिर 78 हजार के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।

बाजार में सबसे अधिक दबाव वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों पर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक में 2.27 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और सर्विसेज क्षेत्र के अधिकांश शेयर भी कमजोर रहे। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार की चाल प्रभावित हुई।

हालांकि व्यापक बाजार में तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, फार्मा, हेल्थकेयर, ऊर्जा, धातु, मीडिया, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रहने से गिरावट का दायरा कुछ हद तक सीमित रहा और बाजार को आंशिक सहारा मिला।

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ट्रेंट, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, सन फार्मा, आईटीसी, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बीईएल और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

लार्जकैप शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 373.70 अंकों की बढ़त के साथ 62,801.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक भी 30.15 अंकों की मजबूती के साथ 19,326.45 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा क्षेत्रों और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी जारी रही।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। ऊंचे कच्चे तेल के दाम आयात लागत, महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में निफ्टी के लिए 24,370 से 24,400 अंक का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 24,130 से 24,100 अंक का क्षेत्र प्रमुख समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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यूपी में मानसून का कहर सड़कों से लेकर मंदिरों तक पानी ही पानी सात की मौत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात https://aajkhabar.in/uttarpradesh-monsoon-heavyrain-floodalert-weatherupdateuttarpradesh-monsoon-heavyrain-floodalert-weatherupdate/ https://aajkhabar.in/uttarpradesh-monsoon-heavyrain-floodalert-weatherupdateuttarpradesh-monsoon-heavyrain-floodalert-weatherupdate/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:09:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/uttarpradesh-monsoon-heavyrain-floodalert-weatherupdateuttarpradesh-monsoon-heavyrain-floodalert-weatherupdate/ उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और...

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उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर वाराणसी प्रयागराज अयोध्या गोरखपुर बरेली और प्रदेश के करीब 20 शहरों में सोमवार को दिनभर बारिश का दौर जारी रहा। लगातार बरसात के कारण कई स्थानों पर सड़कें धंस गईं अस्पतालों में पानी भर गया और धार्मिक स्थलों तक में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 69 शहरों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बारिश का सबसे अधिक असर फिरोजाबाद में देखने को मिला जहां सरकारी अस्पताल परिसर में पानी भर जाने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पुलिसकर्मी घुटनों तक भरे पानी में जूते हाथ में लेकर ड्यूटी करते दिखाई दिए। शामली जिले में नहर टूटने से आसपास की सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया और नहर का पानी गांवों तथा खेतों में फैल गया जिससे किसानों की फसलें प्रभावित होने लगी हैं।

लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण प्रदेश की प्रमुख नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर सहित अनेक छोटे मंदिरों में भी पानी भर गया है। वहीं अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे नदी किनारे के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

बलिया में सरयू नदी और लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के किनारे कटान शुरू हो गया है। प्रशासन को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़ी संख्या में गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। संतकबीरनगर में लगातार बारिश के कारण करीब तीन सौ वर्ष पुराना बाबा बैजूनाथ मंदिर भी ढह गया जिससे क्षेत्र में धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों में चिंता का माहौल है।

पिछले चौबीस घंटों के दौरान बारिश और आकाशीय बिजली से जुड़े हादसों में सात लोगों की जान चली गई। मुजफ्फरनगर में कच्चा मकान गिरने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई जबकि बलिया और चंदौली में खेतों में काम कर रहे दो किसानों की बिजली गिरने से मृत्यु हो गई। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और खेतों में जाने से बचने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने मौसमीय तंत्र और सक्रिय मानसूनी रेखा के कारण प्रदेश में अगले पांच से छह दिनों तक भारी वर्षा का सिलसिला जारी रह सकता है। 22 जुलाई तक कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जबकि उसके बाद भी कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।

लगातार हो रही बारिश ने जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दी है वहीं दूसरी ओर जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अब सभी की नजर मौसम के अगले दौर पर है क्योंकि आने वाले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जेपी नड्डा की अपील, धरना समाप्त करने का अनुरोध; प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान https://aajkhabar.in/jp-nadda-appeals-to-the-cjp-delegation-to-call-off-the-sit-in-protesters-announce-their-decision-to-continue-t/ https://aajkhabar.in/jp-nadda-appeals-to-the-cjp-delegation-to-call-off-the-sit-in-protesters-announce-their-decision-to-continue-t/#respond Mon, 20 Jul 2026 12:09:00 +0000 https://aajkhabar.in/national/jp-nadda-appeals-to-the-cjp-delegation-to-call-off-the-sit-in-protesters-announce-their-decision-to-continue-t/ नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी CJP के धरना-प्रदर्शन के बीच सोमवार...

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नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी CJP के धरना-प्रदर्शन के बीच सोमवार को सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक बातचीत का दौर शुरू हुआ। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने CJP के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील भी की।

जेपी नड्डा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद चर्चा शुरू हुई। उनके अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले मौखिक स्तर पर विस्तृत बातचीत हुई और बाद में उन्हें एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया। उन्होंने कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से विषय को समझने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया।

हालांकि, CJP की ओर से इस मुलाकात को लेकर अलग रुख सामने आया। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई स्पष्ट या ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखीं। उनका कहना है कि संबंधित मुद्दों पर उचित स्तर पर चर्चा का भरोसा जरूर मिला है, लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंताओं का उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि वह पिछले कई सप्ताह से इन मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहा है। ज्ञापन में विभिन्न मांगों के साथ परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।

संगठन ने अपने ज्ञापन में कुछ अन्य मांगें भी सरकार के समक्ष रखी हैं। इनमें आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संबंधित मुद्दों, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई तथा नीट-2026 पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से बल प्रयोग किया गया, जिसे रोकने की भी मांग की गई है।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच शुरू हुआ यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब संसद का मानसून सत्र भी चल रहा है और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष लगातार इस विषय को संसद में उठा रहा है, जबकि सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है। सरकार प्रदर्शन समाप्त करने की अपील कर रही है, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय आने तक धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में आगे की बातचीत और संभावित निर्णय पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

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