March 11, 2026

चार दशक बाद फिर से शुरू होगी वुलर बैराज परियोजना, भारत-पाकिस्तान जल विवाद के बीच बड़ा कदम

1-9-1771136782
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आई गिरावट के बीच भारत ने वुलर बैराज परियोजना को चार दशक बाद पुनः सक्रिय करने का फैसला किया है। यह परियोजना झेलम नदी के पानी का भंडारण और प्रवाह नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

भारत ने लंबे समय तक मानवता के नाम पर निभाई गई सिंधु जल संधि को मानते हुए इस परियोजना को ठंडे बस्ते में रखा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद अब जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र सरकार मिलकर वुलर बैराज पर काम फिर से शुरू करने जा रही हैं।

वुलर झील की वर्तमान स्थिति
झेलम नदी के प्रवाह के अनुसार वुलर झील का आकार बदलता रहता है। न्यूनतम आकार लगभग 20 वर्ग किलोमीटर है, जबकि अधिकतम आकार करीब 190 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया कि उनकी सरकार केंद्र के साथ मिलकर दो बड़ी परियोजनाओं—अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर के लिए जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल (वुलर) परियोजना पर काम कर रही है।

इस परियोजना के पहले एशियाई बैंक से फंडिंग ली गई थी, लेकिन सिंधु जल संधि के कारण इसे रोक दिया गया था। अब जबकि संधि निलंबित हो गई है, परियोजना पर काम फिर से शुरू होगा।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका
वुलर बैराज के निर्माण से स्थानीय लोगों की आजीविका में सुधार होने की उम्मीद है। सर्दियों में झेलम नदी के जल का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे झील के ज्यादातर हिस्से सूख जाते हैं। बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक स्थानीय लोग मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए नावों का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन झील सिकुड़ने के कारण पारंपरिक आजीविका प्रभावित हुई थी। परियोजना के पूरा होने से यह संकट कम होने की संभावना है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान ने लगातार बयान जारी किए और चेतावनी दी कि अगर पानी रोका गया तो इसे युद्ध का कदम माना जाएगा। भारत ने अपना फैसला कायम रखा है और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर परियोजना पर जल्द ही काम शुरू करने जा रही हैं।