गाजा को लेकर US-Russia के बीच खींचतान…. UN में अमेरिका ने पेश किया नया प्रस्ताव
न्यूयार्क। गाजा (Gaza) को लेकर अमेरिका (America) और रूस (Russia) के बीच खींचातानी बढ़ गई है। इस बात को ऐसे समझ सकते है कि अमेरिका (America) ने गाजा पर अपने नए प्रस्ताव के लिए संयुक्त राष्ट्र (United Nations.) में समर्थन जुटाने की कोशिश तेज कर दी है, जबकि रूस ने ट्रंप की प्रस्तावित अंतरिम सत्ता व्यवस्था को हटाकर अपना अलग मसौदा पेश कर दिया है। अहम बात ये है कि रूस के प्रस्ताव में उस ट्रांजशनल अथॉरिटी का जिक्र हटा दिया गया है जिसे अमेरिका के प्लान के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में बनाया जाना है।
रूस चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की संभावनाओं पर भी विकल्प दे। अब ऐसे में दो साल तक चले इस लंबी युद्ध बाद हुए संघर्षविराम को स्थिर करने की कोशिशों के बीच दोनों महाशक्तियों की यह खींचतान सुरक्षा परिषद में अगले सप्ताह होने वाली अहम वोटिंग को और निर्णायक बना रही है।
अमेरिका और इन देशों ने की ये अपील
प्रस्ताव को लेकर अमेरिका के साथ-साथ इस्राइल और हमास संघर्षविराम में अहम भूमिका निभाने वाले देश कतर, मिस्र, यूएई, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, जॉर्डन और तुर्किये ने एक संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी प्रस्ताव को जल्दी अपनाने की अपील की है।
अमेरिका ने क्यों किया प्रस्ताव में बदलाव?
एक यूएन अधिकारी, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि कतर, मिस्र, यूएई, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, जॉर्डन और तुर्किय ने अमेरिका के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया। यह बयान इसलिए आया क्योंकि इसी हफ्ते कुछ देशों ने अमेरिकी प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद अमेरिका ने अपने प्रस्ताव में बदलाव किए और फलस्तीनियों के खुद अपना भविष्य तय करने के अधिकार (फलस्तीनी आत्मनिर्णय) को लेकर ज्यादा साफ और मजबूत भाषा जोड़ दी है।
ऐसे में अब उम्मीद लगाई जा रही है कि अगले हफ्ते अमेरिका और रूस दोनों के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वोटिंग होगी। एक यूएन राजनयिक के मुताबिक अमेरिकी प्रस्ताव को मनचाहे नौ वोट मिल सकते हैं, जबकि रूस और चीन संभवतः वीटो न लगाकर सिर्फ अमेरिकी प्रस्ताव के पक्ष नहीं रहेंगे।
अमेरिकी प्रस्ताव में क्या-क्या?
गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा यूएन में रखा गए प्रस्ताव संघर्षविराम के लिए लाए गए 20 बिंदुओं वाली योजना का समर्थन करता है। इस योजना में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नाम की एक ट्रांजिशनल अथॉरिटी बनाने की बात है, जिसकी अगुवाई ट्रंप करेंगे। प्रस्ताव गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल को मंजूरी भी देगा, जो सीमाओं की निगरानी, सुरक्षा और गाज़ा को हथियारमुक्त करने जैसे काम करेगा।
हालांकि कई अरब देशों ने मामले में साफ-साफ कहा है कि वे तभी अभी सैनिक भेजेंगे जब ऐसा स्पष्ट और मजबूत जनादेश होगा। वहीं कुछ सदस्यों की आपत्ति के बाद, अमेरिका ने प्रस्ताव में यह भी जोड़ दिया है कि फलस्तीनी प्राधिकरण में सुधार और गाजा का पुनर्निर्माण आगे बढ़ने के बाद फलस्तीनी राज्य बनने का रास्ता खुल सकता है।
रूस के प्रस्ताव में फलस्तीनी राज्य को मजबूत समर्थन
दूसरी तरफ रूस के प्रस्ताव में फलस्तीनी राज्य को मजबूत समर्थन दिया गया है। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया है कि वेस्ट बैंक और गाजा एक साथ मिलकर फलस्तीनी प्राधिकरण के तहत एक राज्य बनें।रूस का कहना है कि वह सिर्फ अमेरिकी प्रस्ताव को पहले से मौजूद संयुक्त राष्ट्र के फैसलों और दो-राष्ट्र समाधान के सिद्धांतों के अनुरूप करना चाहता है। रूस का यह भी कहना है कि उसका प्रस्ताव अमेरिकी पहल का विरोध नहीं करता और वह अमेरिकी, कतर, मिस्र और तुर्किये की मध्यस्थता के प्रयासों का सम्मान करता है।
