India Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/tag/india/ News website Tue, 14 Apr 2026 06:41:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://aajkhabar.in/wp-content/uploads/2026/03/cropped-cropped-aajkhabar-Logo04-32x32.png India Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/tag/india/ 32 32 भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा https://aajkhabar.in/international/so-much-hatred-for-india-a-notice-was-sent-to-the-channel-for-playing-asha-bhosles-songs-in-pakistan/ https://aajkhabar.in/international/so-much-hatred-for-india-a-notice-was-sent-to-the-channel-for-playing-asha-bhosles-songs-in-pakistan/#respond Tue, 14 Apr 2026 06:41:00 +0000 https://aajkhabar.in/international/so-much-hatred-for-india-a-notice-was-sent-to-the-channel-for-playing-asha-bhosles-songs-in-pakistan/ इस्‍लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले पर कंटेंट चलाने को लेकर पाकिस्तान में एक चैनल...

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इस्‍लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले पर कंटेंट चलाने को लेकर पाकिस्तान में एक चैनल को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में नियामक की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि भारतीय कंटेंट का प्रसारण करना मना है। साथ ही चैनल से इस संबंध में जवाब भी तलब किया गया है। भोसले का रविवार को मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया था। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियोन्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने भोसले की मौत की खबर के साथ भारतीय सामग्री क्यों प्रसारित की। पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर प्रतिबंध 2018 से लागू है।
PEMRA ने कहा कि भोसले की मौत की खबर प्रसारित करते समय जियोन्यूज ने भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना, पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है। जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है।
जियोन्यूज के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने एक पोस्ट में कहा, ‘प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनकी सराहना करना हमेशा से एक परंपरा रही है। वास्तव में, आशा भोसले जैसी कलाकार के लिए, हमें उनके कालजयी और यादगार गीतों को और भी अधिक साझा करना चाहिए था। फिर भी, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, PEMRA ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।’
भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ बज रहा था।

लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए।

दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे।

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भारतीयता में समाहित है वैश्विक कल्याण का मार्ग https://aajkhabar.in/discussion/the-path-to-global-well-being-is-inherent-in-the-essence-of-indianness/ https://aajkhabar.in/discussion/the-path-to-global-well-being-is-inherent-in-the-essence-of-indianness/#respond Fri, 10 Apr 2026 08:21:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/10/the-path-to-global-well-being-is-inherent-in-the-essence-of-indianness/ – प्रो. एस. के. सिंहवर्तमान में अविश्वास की परतों से घिरी हुई विश्व व्यवस्था अनेक...

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– प्रो. एस. के. सिंह

वर्तमान में अविश्वास की परतों से घिरी हुई विश्व व्यवस्था अनेक प्रकार के संघर्षों एवं अस्थिरताओं से जूझ रही है। ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल युद्ध, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई असंगत कार्यवाही, लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध, पर्यावरण संकट, मानसिक तनाव एवं बढ़ती असहिष्णुता इस बात का प्रमाण है कि आज विश्व गहरे संकट से गुजर रहा है।

वस्‍तुत: पिछले कुछ समय की सैन्य गतिविधियों को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि विश्व-व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है एवं धीरे-धीरे दुनिया ‘जंगलराज’ की ओर बढ़ रही है। टैरिफ को लेकर ट्रंप के अपरिपक्व एवं गैर-जिम्मेदार रवैये तथा पल-पल बदलते उनके बचकाने बयानों ने भूमंडलीकरण के मूल उद्देश्यों पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। जिस भूमंडलीकरण को परस्पर निर्भरता, वैश्विक सहयोग एवं साझा प्रगति का आधार माना गया था, आज वह कमजोर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इन विषम परिस्थितियों में भारतीय दर्शन, भारत की संस्कृति अर्थात् ‘भारतीयता’ एक ऐसा विकल्प है जो विश्व में स्थायी शांति, संतुलन, समन्वय एवं सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

हजारों सालों से पूरी पृथ्वी को एक मानने एवं मानवता के समग्र कल्याण पर आधारित ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जैसे भारतीय सिद्धांतों में विकास और प्रगति का अर्थ किसी एक व्यक्ति या किसी एक राष्ट्र का हित नहीं बल्कि समग्र रूप में पूरी मानवता का कल्याण करना है, अर्थात् ‘स्व’ से ‘सर्व’ की यात्रा ही भारतीयता है। भारतीयता के इस मूल भाव को भारतीय जीवन दृष्टि के विभिन्न पहलुओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

भारतीयता का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रकृति के साथ निकटता, सामंजस्य एवं संतुलन रखना है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में वृक्षों, नदियों, पर्वतों एवं धरती को पूजनीय माना गया है, जिसमें यह मान्यता है कि प्रकृति के साथ समन्वय रखकर ही पृथ्वी को बचाकर जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है। सत्य, परोपकार, त्याग, दया, करुणा, अहिंसा, सहिष्णुता, नैतिकता, भक्ति, समर्पण, संयम और राष्ट्रप्रेम जैसे भारतीय जीवन मूल्य, मूल्य-आधारित भारतीयता की आत्मा हैं। कई तरह की विविधताओं के बावजूद ‘अनेकता में एकता’ भी भारतीयता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ‘साईं इतना दीजिए जामें कुटुम्ब समाय’ अर्थात् हमें उतना ही संचय करना चाहिए, जितना आवश्यक है।

भारतीय मूल्यों की यह गहन अभिव्यक्ति भारतीयता के उस पहलू को उजागर करती है जहां व्यक्तिगत और सामूहिक हित साथ-साथ चलते हैं। इसके विपरीत पाश्चात्य चिंतन के मूल में व्यक्ति, भौतिकता, बाहरी दुनिया एवं बाहरी उपलब्धियां हैं। इसलिए पश्चिम का मूल स्वभाव स्वार्थ है न कि सद्भाव। जिसके कारण कभी-कभी किसी एक व्यक्ति की अनैतिक एवं अनुचित महत्वाकांक्षाओं का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है। ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध के चलते पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।

अनगिनत लाभ होने के बावजूद अनियंत्रित लालच तथा विज्ञान एवं तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता हमारे विनाश का कारण भी बन सकती है। भारत का स्पष्ट मानना है कि विज्ञान का उपयोग मानवता एवं मानव कल्याण के लिए होना चाहिए न कि व्यक्तिगत लाभ तथा भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ एवं प्रभुत्व स्थापित करने के लिए। यही कारण है कि 16 से 20 फरवरी, 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखी गई थी। इसके पूर्व नई दिल्ली में ही आयोजित जी-20 के शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ थी, जिसमें वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर का नारा दिया गया था।

स्पष्ट है कि भारत को जब भी दुनिया का नेतृत्व करने का अवसर मिला है, भारत ने सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश की है। चूंकि विस्तारवादी सोच की शुरुआत हमेशा लालच से होती है, इसलिए भारतीय चिंतन में इस सोच को कभी भी प्रश्रय नहीं दिया गया। आध्यात्मिकता भारतीय चिंतन की मूल विशेषता है, इसलिए भारतीयता के हर पहलू में हमें इसकी झलक दिखाई देती है। सदियों से भारत में शिक्षा को विद्या, छात्र को विद्यार्थी एवं शिक्षक को गुरु कहा जाता था। शिक्षा हमें बाहरी ज्ञान एवं जीवनयापन सिखाती है, जबकि विद्या एक आंतरिक गुण है जो कि हमारे विवेक, संस्कारों एवं आचरण से जुड़ी होती है तथा हमें सही एवं गलत में भेद करना सिखाती है। शिक्षा सिर्फ सफलता तक सीमित रहती है जबकि विद्या हमें सार्थकता तक ले जाती है।

श्री विष्णु पुराण में उल्लेख है कि ‘तत्कर्म यन्न बन्धाय, सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात् कर्म वही है जो बंधन में न बांधे और विद्या वही है जो मुक्त करे। यही कारण है कि भारतीयता में आत्म-बोध अर्थात् आत्म-साक्षात्कार पर विशेष बल दिया गया है। शिक्षा वह है जिसे प्राप्त करने के बाद विनम्रता आए एवं व्यक्ति, व्यक्तिगत लाभ की जगह सामूहिक हित को प्राथमिकता दे, इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा में कहा गया है कि ‘विद्या ददाति विनयं’ अर्थात् सच्ची विद्या से व्यक्ति में विनम्रता आती है। भारतीय ज्ञान परंपरा त्याग, परोपकार एवं आत्मबोध पर आधारित होने के कारण संयम, उत्तरदायित्व एवं कर्तव्यबोध की भावना उत्पन्न करती है, जबकि पाश्चात्य ज्ञान परंपरा तर्क, विज्ञान एवं भौतिकता पर आधारित होने के कारण प्रतिस्पर्धा, अहंकार, श्रेष्ठता-बोध एवं आत्मकेन्द्रित बनाती है।

यहां स्पष्ट है कि दुनिया में यदि स्थायी शांति एवं सद्भाव स्थापित करना है तो हमें भारतीयता के मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना होगा। यहां पर यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अतीत की ओर लौटना ही भारतीयता नहीं है, बल्कि ‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ की सोच के साथ भविष्य के लिए एक संतुलित एवं मानवीय मार्ग का निर्माण करना भारतीयता का एक प्रमुख गुण है। यह केवल अतीत की धरोहर नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।

पर्यावरणीय असंतुलन, नैतिक पतन एवं सामाजिक विघटन के इस दौर में भारतीयता के मूल तत्वों से प्रेरित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पंच परिवर्तन’ न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं, क्योंकि भारतीयता का मूल आधार भौगोलिक सीमाएं नहीं बल्कि समस्त जड़-चेतन एवं मानवता है। संघ के पंच परिवर्तन का किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विरोध न किया जाना इसकी व्यापक स्वीकार्यता एवं सहमति का सबसे बड़ा प्रमाण है। भारतीयता एवं संवैधानिक आदर्शों से प्रेरित सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी चेतना एवं नागरिक कर्तव्य ऐसे आधारभूत मूल्य हैं जो न केवल भारत के उत्थान तक सीमित हैं बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक और उपयोगी हैं। स्वार्थ एवं संघर्ष में फंसी दुनिया के लिए भारतीयता ही एक मात्र विकल्प है।

ऐसे में कहना यही है कि वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में आज विश्व जिन समस्याओं से जूझ रहा है, उन सभी का स्थायी समाधान भारतीयता पर आधारित शिक्षा में निहित है। ऐसी शिक्षा जो आधुनिकता को भारतीय पहचान से जोड़े भारतीय शिक्षा है। शिक्षा में भारतीयता का आशय सिर्फ पीछे मुड़कर देखना नहीं बल्कि वर्तमान से सामंजस्य स्थापित कर एक ऐसी जीवन दृष्टि प्रदान करना है जिसमें व्यक्ति यह समझ सके कि केवल विज्ञान नहीं बल्कि विज्ञान एवं आध्यात्मिकता का सामंजस्य ही वैश्विक समस्याओं के स्थायी समाधान का मूल मंत्र है। आध्यात्मिकता एवं स्वीकार्यता भारतीयता की वे सार्वभौमिक विशेषताएं हैं जो भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती हैं। यही कारण है कि आज भारत वैश्विक परिदृश्य में एक नई उम्मीद और विश्वास के केन्द्र के रूप में उभर रहा है।

(लेखक जीवाजी विश्वविद्यालय में वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययनशाला में विभागाध्यक्ष हैं।)

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LPG कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार 2840 जगह छापे हजारों सिलेंडर जब्त https://aajkhabar.in/madhya-pradesh/major-crackdown-on-lpg-black-marketing-raids-at-2840-locations-thousands-of-cylinders-seized/ https://aajkhabar.in/madhya-pradesh/major-crackdown-on-lpg-black-marketing-raids-at-2840-locations-thousands-of-cylinders-seized/#respond Fri, 10 Apr 2026 07:50:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/10/major-crackdown-on-lpg-black-marketing-raids-at-2840-locations-thousands-of-cylinders-seized/ भोपाल । मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए...

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भोपाल । मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा और सख्त अभियान चलाया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अगुवाई में पूरे प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया गया जिसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आईं।

अभियान के तहत प्रदेशभर में कुल 2840 स्थानों पर जांच की गई जहां से 3691 एलपीजी गैस सिलेंडर जब्त किए गए। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत की गई है जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है। इस दौरान 11 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई जबकि पेट्रोल पंपों पर भी सख्ती दिखाई गई और 734 रिटेल आउटलेट की जांच में एक मामला दर्ज किया गया।

सरकार ने केवल कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि आगे की व्यवस्था को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की पाइपलाइन पहुंच चुकी है वहां के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द पीएनजी कनेक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं।

स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि उपभोक्ता आगामी तीन महीनों में पीएनजी कनेक्शन नहीं लेते हैं तो उन्हें एलपीजी गैस की सप्लाई बंद की जा सकती है। यह कदम गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है ताकि कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

सरकार ने सीजीडी संस्थाओं को भी निर्देशित किया है कि वे पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन मिलने के 24 घंटे के भीतर पाइपलाइन बिछाने की स्वीकृति जारी करें। इसके साथ ही पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठान, सरकारी कॉलोनियों और सुधार गृहों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन देने को कहा गया है।

औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस बदलाव में शामिल किया जा रहा है। जहां जहां पाइपलाइन उपलब्ध है वहां की औद्योगिक इकाइयों को चिन्हित कर उन्हें पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक नियंत्रित और प्रभावी बन सके।

इस अभियान के तहत विभिन्न गैस कंपनियों जैसे GAIL Gas Limited Indian Oil Corporation Bharat Petroleum और Gujarat Gas को कंट्रोल रूम नंबर जारी कर उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करने की सुविधा दी गई है।

सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब गैस वितरण में पारदर्शिता और सख्ती दोनों साथ साथ लागू की जाएंगी। एलपीजी की कालाबाजारी पर लगाम कसने के साथ साथ पीएनजी को बढ़ावा देकर एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प की ओर बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

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भारत के लिए गुड न्यूज है सीजफायर, LPG पर पड़ेगा बड़ा असर; कितने दिन खुलेगा होर्मुज https://aajkhabar.in/international/ceasefire-is-good-news-for-india-will-have-a-big-impact-on-lpg/ https://aajkhabar.in/international/ceasefire-is-good-news-for-india-will-have-a-big-impact-on-lpg/#respond Wed, 08 Apr 2026 07:53:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/08/ceasefire-is-good-news-for-india-will-have-a-big-impact-on-lpg/ वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात...

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वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात सामान्य हो सकते हैं। एक ओर जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो सप्ताह के युद्ध विराम का ऐलान किया है। वहीं, ईरान ने भी होर्मुज जलमार्ग खोलने पर सहमति जता दी है। अब यह घोषणा भारत के लिए भी खुशखबरी साबित हो सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच देश में ईंधन संकट गहराता जा रहा था।
कब तक मिलेगी राहत

ट्रंप ने लिखा, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर आज रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरा, तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर दो हफ्ते के लिए बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हो गया हूं।’

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान भी सीजफायर के लिए तैयार हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने माना है कि तेहरान की तरफ से मांगें स्वीकार कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी बलों के समन्वय के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से इन दो सप्ताह के लिए जहाजों को सुरक्षित तरीके से निकलने दिया जाएगा।
भारत पर क्यों पड़ा था होर्मुज बंद होने का असर

युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया था। अब इसके चलते भारत में ईंधन सप्लाई को बड़ा झटका लगा था।

खबरें हैं कि भारत का 40 फीसदी कच्चा तेल आयात, 50 प्रतिशत से ज्यादा LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस और 90 प्रतिशत LPG इस स्ट्रेट के जरिए ही पश्चिम एशिया से आता था।
भारत को दे दी थी अनुमति

होर्मुज जलमार्ग ईरान की तरफ से बंद किए जाने के बाद यहां जहाजों का आवागमन करीब 95 प्रतिशत गिर गया था। हालांकि, इसके कुछ समय बाद ईरान ने भारत समेत कुछ देशों को मित्र करार दिया और होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की तरफ से जारी बयान के अनुसार, चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी गई थी।
कितने भारतीय जहाज अटके

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारतीय बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे हैं, जबकि 16 अन्य मालवाहक जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि 46,650 टन एलपीजी से लदा टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ सात अप्रैल को भारत पहुंचेगा। जबकि 15,500 टन गैस लेकर ‘ग्रीन आशा’ टैंकर नौ अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा।

फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों में एक एलएनजी पोत, दो एलपीजी टैंकर, छह कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज, तीन कंटेनर पोत, एक ड्रेजर, एक रसायन ले जाने वाला पोत और दो थोक मालवाहक शामिल हैं।

वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को पार करने के लिए ईरान द्वारा शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।’

भारतीयों को मिलेगी राहत

भारत रसोई गैस की अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में इन टैंकरो का आगमन देश में एलपीजी आपूर्ति पर दबाव को कम करने में मदद करेगा। वहीं, अब जब होर्मुज दो सप्ताह के लिए खुलने जा रहा है, तो भारत आने वाले जहाजों में तेजी आएगी। ऐसे में भारत को बड़ी राहत मिल सकती है। दरअसल, भारत की सालाना एलपीजी खपत 33 मिलियन टन से ज्यादा की है।

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भारत: अस्थिर दुनिया में आत्म निर्भरता जरूरी https://aajkhabar.in/discussion/india-self-reliance-is-essential-in-an-unstable-world/ https://aajkhabar.in/discussion/india-self-reliance-is-essential-in-an-unstable-world/#respond Tue, 07 Apr 2026 08:36:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/07/india-self-reliance-is-essential-in-an-unstable-world/ – प्रो. महेश चंद गुप्तादुनिया अब अलग-अलग बिखरे देशों का नक्शा मात्र नहीं रही है।...

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– प्रो. महेश चंद गुप्ता

दुनिया अब अलग-अलग बिखरे देशों का नक्शा मात्र नहीं रही है। यह एक ऐसा तंत्र बन गई है जिसमें कहीं भी हलचल होती है तो उसकी तरंगें दुनिया के हर कोने तक पहुंचती हैं। हाल में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच टकराव की स्थिति के बाद पैदा हुए तनाव ने इस सच्चाई को फिर से उजागर कर दिया है। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध से भी यह सबक मिल चुका है कि जंग किसी एक भूभाग तक सीमित नहीं रहती। उसके असर सीमाओं से परे जाते हैं। इस बात को हम लागू होते देख रहे हैं।

भारत इस अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष का हिस्सा नहीं है लेकिन उसका असर हमारे यहां साफ दिखाई दे रहा है। पेट्रोल और एलपीजी की आपूर्ति में अस्थिरता, छोटे उद्योगों का ठप पड़ना, निर्यात पर असर—ये सब संकेत दे रहे हैं कि वैश्विक अस्थिरता का बोझ हम भी ढो रहे हैं। दुनिया इतनी छोटी हो चुकी है कि कई लोग इसकी तुलना एक गांव से भी करते हैं। मानना ही होगा कि यह एक ऐसा साझा घर बन चुकी है, जिसकी एक दीवार पर आग लगे तो दूसरी दीवार पर बैठे लोग भी उसकी आंच महसूस करते हैं। यही वजह है कि ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। उसकी छाया हमारे रसोईघर, बाजार और छोटे-छोटे काम-धंधों तक आ पहुंची है।

भारत की नीति स्पष्ट रूप से शांति की है लेकिन वैश्विक व्यवस्था में उसकी भागीदारी इतनी गहरी है कि किसी भी तनाव के असर से बचना संभव नहीं है। शहरों में ठेले पर चाय बेचने वाला हो या मिठाई की दुकान चलाने वाला हलवाई, हर किसी के काम पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। गैस सिलेंडर की बुकिंग में देरी अब सिर्फ एक असुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कमाई पर चोट बनती जा रही है। इसका बड़ा कारण मूलभूत जरूरतों के लिए हमारा अन्य देशों पर निर्भर होना है। बड़ा सवाल यह है कि क्या हम अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए इतने अधिक बाहरी स्रोतों पर निर्भर हो चुके हैं कि कहीं भी हलचल हो और हमारी जमीन हिलने लगे?

यह सच है कि हमारी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आज भी आयात किए गए तेल और गैस से पूरा होता है। खाड़ी क्षेत्र में तनातनी बढ़ते ही सप्लाई चेन पर दबाव पड़ता है और उसका सीधा असर हमारे घरों तक पहुंचता है। यह निर्भरता केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि रणनीतिक कमजोरी भी है। लेकिन बात केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है। भारत का औद्योगिक और कृषि ढांचा भी कई मायनों में वैश्विक आपूर्ति पर टिका हुआ है। खाद्य तेल से लेकर उर्वरकों तक, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रक्षा उपकरणों तक कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हम पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हैं। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब वैश्विक संकट लंबा खिंचने लगता है।

तीन दशक पहले सद्दाम हुसैन को काबू करने के लिए मित्र देशों द्वारा इराक पर हमलों से डीजल-पेट्रोल के लिए हमारे देश में लगी लंबी कतारें हमें याद हैं। अब हम कमोबेश वैसी ही स्थिति की आशंका देख रहे हैं। बात केवल आयात की नहीं है, निर्यात भी इस संकट से प्रभावित हो रहा है। बीकानेर का भुजिया, महाराष्ट्र के केले, कपड़ा उद्योग और समुद्री उत्पाद आदि सबका अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना अब पहले जैसा सहज नहीं रहा। जलगांव से रोजाना दो से तीन हजार टन केला खाड़ी देशों व यूरोप को निर्यात होता है लेकिन इस युद्ध ने निर्यात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। केले से भरे सैकड़ों कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इसी प्रकार बीकानेर से भुजिया का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। समुद्री रास्तों में असुरक्षा और लागत बढ़ने से कई व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह केवल माल की आवाजाही का संकट नहीं है, बल्कि इन उद्योगों से जुड़े लाखों लोगों की रोजी-रोटी का भी सवाल है।

भारत की आत्मनिर्भरता की बहस में सूचना एवं प्रौद्योगिकी का क्षेत्र अक्सर नजरअंदाज हो जाता है जबकि यह आज की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए बेहद अहम है। भारत डिजिटल रूप से तेजी से आगे बढ़ा है, लेकिन इस डिजिटल ढांचे की बुनियाद अब भी काफी हद तक विदेशी तकनीक पर टिकी है। मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, क्लाउड सेवाएं, सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बाहरी कंपनियों के नियंत्रण में हैं। ऐसे में वैश्विक तनाव या प्रतिबंधों की स्थिति में यह निर्भरता गंभीर जोखिम बन सकती है। इंटरनेट के क्षेत्र में भी हालात अलग नहीं हैं। सोशल मीडिया, सर्च इंजन और डेटा स्टोरेज जैसे प्लेटफॉर्म विदेशी स्वामित्व में हैं जिससे डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता पर सवाल उठते हैं। यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक चुनौती भी है।

इसके साथ ही, भारत में मौलिक आविष्कारों की कमी भी चिंता का विषय है। आईटी सेवाओं में मजबूती के बावजूद, शोध और पेटेंट के मामले में भारत अभी पीछे है। रिसर्च और डवलपमेंट पर कम निवेश इसकी वजह हैं। ऐसे में आत्मनिर्भरता के लिए तकनीकी नवाचार को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है। यह परिदृश्य हमें बाध्य कर रहा है कि हम आत्मनिर्भरता के उस विचार की ओर लौटें जिसे हम अक्सर नारे के रूप में इस्तेमाल करते आए हैं लेकिन उसे व्यवहार में पूरी तरह उतार नहीं पाए हैं।

आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से कट जाना नहीं है, बल्कि इतना सक्षम बनना है कि वैश्विक उथल-पुथल का असर सीमित किया जा सके। मौजूदा समय में सवाल यह नहीं है कि भारत को वैश्विक व्यापार से दूरी बनानी चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हमारी अपनी नींव इतनी मजबूत है कि बाहरी झटकों को सह सके?

समय की मांग है कि हमें ऊर्जा के क्षेत्र में वैकल्पिक रास्तों की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए। सौर और पवन ऊर्जा अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहे हैं, बल्कि आर्थिक स्थिरता का आधार भी बन चुके हैं। इसी प्रकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना, छोटे उद्योगों को तकनीक और वित्तीय सहायता देना और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना जरूरी है क्योंकि ऐसे कदम ही भारत को भीतर से सशक्त बना सकते हैं।

इस बीच, कुछ ऐसे सवाल भी हैं जिनका उत्तर हमें खोजना चाहिए। बड़ा सवाल है कि क्या हमने सस्ते आयात के लालच में अपनी उत्पादन क्षमता को कमजोर कर दिया है? क्या हमारी नीतियां दीर्घकालिक सोच के बजाय तात्कालिक लाभ पर अधिक केंद्रित रही हैं? और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या हम हर संकट के बाद कुछ समय के लिए जागते हैं और फिर वही पुरानी लापरवाही ओढ़ लेते हैं? दुनिया में अस्थिरता निरंतर बढ़ रही है। कभी इस देश में तो कभी उस देश में कुछ न कुछ संकट खड़ा हो ही जाता है।

मानना पड़ेगा कि दुनिया में अस्थिरता अब अपवाद नहीं रही है बल्कि एक स्थाई स्थिति बनती जा रही है। एक युद्ध खत्म होता नहीं है तो दूसरा शुरू हो जाता है। ऐसे में यह उम्मीद करना कि सब कुछ सामान्य रहेगा, शायद खुद को धोखा देने जैसा ही होगा। हमारे सामने चुनौती यह नहीं है कि वह इन युद्धों को रोक सके बल्कि बड़ी चुनौती यह है कि हम इनके प्रभाव को अपने यहां किस हद तक सीमित कर पाते हैं। जब दुनिया जलती है तो उसकी आंच से बचना संभव नहीं है लेकिन हम अपने घर को आग से बचाने के प्रयत्न तो कर ही सकते हैं। आत्म निर्भरता उसी बचाव का नाम है। आत्म निर्भरता ही एक ऐसा कवच है, जो हमें संकट से बचा सकता है। हमारा देश आत्मनिर्भर बने, इसके लिए कदम उठाने ही होंगे। इसके लिए सरकार, हमारे नीति नियंताओं, नागरिकों, संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। यह परिहार्य है, इस बात को समझा जाना चाहिए।

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भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट https://aajkhabar.in/national/textile-sector-is-expanding-rapidly/ https://aajkhabar.in/national/textile-sector-is-expanding-rapidly/#respond Tue, 07 Apr 2026 05:17:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/07/textile-sector-is-expanding-rapidly/ नई दिल्ली। भारत (India) का कपड़ा और अपैरल बाजार (Textile and Apparel Market) तेजी से...

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नई दिल्ली।
भारत (India) का कपड़ा और अपैरल बाजार (Textile and Apparel Market) तेजी से विस्तार कर रहा है और इसकी झलक हाल ही में जारी रिपोर्ट में साफ दिखाई देती है। वस्त्र मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, देश का टेक्सटाइल मार्केट (Textile market) 2024 में बढ़कर 14.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2010 में सिर्फ 4.89 लाख करोड़ रुपये था, यानी पिछले करीब 14 साल में इस सेक्टर ने शानदार ग्रोथ दिखाई है और यह हर साल औसतन 8.3% की दर से बढ़ा है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू मांग में लगातार इजाफा है। जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ रही है और लाइफस्टाइल बदल रहा है, वैसे-वैसे कपड़ों पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आज के समय में सिंथेटिक और मिक्स फाइबर वाले कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इनका कुल बाजार में हिस्सा 52.2% तक पहुंच गया है, जबकि कॉटन यानी सूती कपड़ों की हिस्सेदारी 41.2% है। वहीं, सिल्क और ऊन जैसे रेगुलर फाइबर की हिस्सेदारी काफी कम है। खास बात यह है कि सिंथेटिक और मिक्स फाइबर का बाजार 2010 के 1.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को दर्शाता है। लोग अब ऐसे कपड़े पसंद कर रहे हैं, जो सस्ते, टिकाऊ और मेंटेन करने में आसान हों।

इस ग्रोथ में घरेलू उपभोक्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों द्वारा कपड़ों पर खर्च 2010 के 4.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है, यानी कुल बाजार का बड़ा हिस्सा घरेलू खपत से ही आ रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति खर्च भी तेजी से बढ़ा है। 2010 में जहां एक व्यक्ति औसतन 2,119 रुपये कपड़ों पर खर्च करता था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 6,066 रुपये हो गया है। यह दिखाता है कि लोग अब फैशन और ब्रांड्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

एक और दिलचस्प बात यह है कि कपड़ा बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खरीद में महिलाओं का योगदान 55.5% है, जबकि मेल की हिस्सेदारी 44.5% है, यानी इस सेक्टर की ग्रोथ में महिला उपभोक्ता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं।

भारत का टेक्सटाइल सेक्टर न सिर्फ तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि इसमें बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आय और फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता इस ग्रोथ को आगे भी गति दे सकती है। आने वाले समय में यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत इंजन साबित हो सकता है।

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LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज https://aajkhabar.in/national/amid-the-lpg-crisis-another-relief-news/ https://aajkhabar.in/national/amid-the-lpg-crisis-another-relief-news/#respond Mon, 06 Apr 2026 04:57:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/06/amid-the-lpg-crisis-another-relief-news/ नई दिल्ली। भारत (India) में एलपीजी (LPG) की कमी के बीच बड़ी राहत की खबर...

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नई दिल्ली।
भारत (India) में एलपीजी (LPG) की कमी के बीच बड़ी राहत की खबर है। ईरान युद्ध के बीच होर्मुज (Hormuz) से भारत के 9वें टैंकर को निकले की इजाजत मिल गई है। ‘ग्रीन आशा’ नाम का भारतीय झंडे वाला यह पोत बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इससे पहले 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सांवी’ को होर्मुज से निकलने की इजाजत मिली थी। इससे 46 हजार टन एलपीजी भारत पहुंच रही है। इससे कहा जा सकता है कि जल्द ही भारत में एलपीजी की किल्लत दूर होने वाली है।


एक और एलपीजी टैंकर कर रहा इंतजार

रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक और पोत ‘जग विक्रम’ अभी परमीशन का इंतजार कर रहा है। ये भी टैंकर होर्मुज से पहले ही रुककर इजाजत का इंतजार करते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इन्हें पास कराया जाता है। कच्चे तेल और एलपीजी वाले पोतों को प्राथमिकता दी जाती है। ईरान ने स्पष्ट कह दिया है कि भारत के टैंकरों को होर्मुज से निकलने की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा अमेरिका और इजरायल का साथ देने वाले देशों के लिए होर्मुज बंद माना जाए।

इससे पहले BW TYR टैंकर मुंबई पहुंचा है। शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज के पास अभी 16 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से पांच शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। ओमान की खाड़ी , अदन की खाड़ी और लाल सागर में भी कुछ भारतीय जहाज मौजूद हैं।


खाड़ी में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक

खाड़ी इलाकों में भारतीय नाविकों की संख्या भी काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में भारत के कम से कम 20 हजार 500 नाविक हैं। इनमें से 504 नाविक ही भारतीय शिप पर हैं। 3 अप्रैल को अलग-अलग शिपिंग कंपनियों द्वारा 1130 नाविकों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत ईरान की सरकार के साथ कूटनीतिक वार्ता भी कर रहा है। ईरान का भी रुख भारत के प्रति बेहद नरम है।

डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को होर्मुज खोलने के लिए चेतावनी दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि तेहरान में एक ‘भीषण हमले’ में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को ‘खत्म’ कर दिया गया है। उन्होने कहा कि अगर ईरान अब भी नहीं मानता है तो ऐसे अभियान चलते रहेंगे। उन्होंने कहा, “याद रखें जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दस दिन का समय दिया था। अब समय खत्म हो रहा है-48 घंटे बचे हैं, इसके बाद उन पर चौतरफा आफत बरसेगी।”

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डिजिटलीकरण की रफ्तार और ‘डिजिटल जहर’ का खतरा https://aajkhabar.in/discussion/the-pace-of-digitization-and-the-threat-of-digital-poison/ https://aajkhabar.in/discussion/the-pace-of-digitization-and-the-threat-of-digital-poison/#respond Sat, 04 Apr 2026 09:08:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/04/the-pace-of-digitization-and-the-threat-of-digital-poison/ -सुनील कुमार महला आज हमारा देश भारत तेजी से डिजिटाइजेशन की ओर अग्रसर है, और...

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-सुनील कुमार महला

आज हमारा देश भारत तेजी से डिजिटाइजेशन की ओर अग्रसर है, और कहना ग़लत नहीं होगा कि इसमें स्मार्टफोन विशेषकर एंड्रॉयड का सबसे बड़ा योगदान है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि वैश्विक स्तर पर जहां एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 3.9 अरब (390 करोड़) है, वहीं भारत में वर्ष 2025–2026 के अनुमान के अनुसार कुल स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 75 करोड़ (750 मिलियन) तक पहुंच चुकी है। इनमें से लगभग 89%-90% स्मार्टफोन एंड्रॉयड आधारित हैं। अर्थात सरल शब्दों में कहें तो भारत में करीब 65-70 करोड़ लोग एंड्रॉयड फोन का उपयोग कर रहे हैं।यह भी कहा जा सकता है कि आज हर 10 में से लगभग 9 लोग एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वास्तव में, हमारे देश में सस्ते डेटा प्लान, किफायती स्मार्टफोन और डिजिटल सेवाओं का विस्तार इस तेज़ी के प्रमुख कारण हैं।

हालांकि, इस डिजिटल क्रांति का एक चिंताजनक पहलू भी सामने आ रहा है-‘डिजिटल जहर’ अर्थात मोबाइल और स्क्रीन की बढ़ती लत, जो विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। आंकड़े इस समस्या की भयावहता को स्पष्ट करते हैं। क्या यह चिंताजनक बात नहीं है कि हमारे देश में 0-5 वर्ष के बच्चे प्रतिदिन औसतन 2.2 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से लगभग दोगुना है। वहीं, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी औसतन 1.2 घंटे स्क्रीन देखते हैं, जबकि उनके लिए स्क्रीन टाइम शून्य होना चाहिए।

इतना ही नहीं, यदि हम यहां पर स्कूल जाने वाले बच्चों की बात करें, तो एक अध्ययन के अनुसार 62.5% बच्चों में मध्यम से उच्च स्तर की स्क्रीन लत पाई गई है, और उनका औसत स्क्रीन टाइम लगभग 4 घंटे प्रतिदिन है। एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि भारत के 74% छात्र रोजाना 2 घंटे से अधिक स्क्रीन का उपयोग करते हैं, जिनमें से 21% बच्चे 4 घंटे से भी अधिक समय मोबाइल, गेमिंग या सोशल मीडिया पर बिताते हैं। लगभग 70% माता-पिता का मानना है कि उनके बच्चे वीडियो और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के आदी हो चुके हैं। और भी चिंता की बात यह है कि 64% बच्चे सोशल मीडिया और गेमिंग के आदी हैं, जबकि केवल 20% बच्चों में किसी प्रकार की डिजिटल लत नहीं पाई गई है।एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार आज के समय में भारत में लगभग 90% किशोरों के पास स्मार्टफोन की पहुंच है और 76% बच्चे मनोरंजन के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भी डिजिटल लत को बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बताया है, क्योंकि यह उनकी पढ़ाई, एकाग्रता और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

इस डिजिटल लत के दुष्परिणाम भी स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। मसलन, ध्यान में कमी, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, पढ़ाई में गिरावट, सामाजिक दूरी, अकेलापन, मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। यहां पाठकों को बताता चलूं कि हाल ही में राज्यसभा में भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया, जहां यह बताया गया कि कई बच्चे प्रतिदिन 7-8 घंटे मोबाइल स्क्रीन पर बिता रहे हैं। इससे उनकी शिक्षा, सामाजिक जीवन और नींद पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।विशेषज्ञों ने इस स्थिति को ‘डिजिटल गुलामी’ तक करार दिया है, क्योंकि बच्चे मोबाइल के बिना स्वयं को असहज महसूस करते हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर लाइक्स और कमेंट्स की होड़ बच्चों में हीन भावना, तनाव और अवसाद को बढ़ा रही है, वहीं ऑनलाइन बुलिंग जैसी समस्याएं भी उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। हाल ही में एक अमेरिकी अदालत ने भी यह माना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का डिजाइन इस प्रकार बनाया जाता है कि उपयोगकर्ता बार-बार उन्हें इस्तेमाल करें, जिससे लत की प्रवृत्ति बढ़ती है। इस बढ़ती समस्या के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। राज्यसभा में राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने, स्कूलों में ‘डिजिटल हेल्थ’ को पाठ्यक्रम में शामिल करने और सोशल मीडिया तथा गेमिंग कंपनियों पर सख्त नियम लागू करने की मांग की गई है। साथ ही, अभिभावकों को यह सलाह दी गई है कि वे बच्चों पर केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय उनसे खुलकर संवाद करें, उनके साथ समय बिताएं और उन्हें खेल-कूद तथा रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें।

अंततः, यह स्पष्ट है कि डिजिटल लत अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों ने जहां अभिव्यक्ति और सूचना के नए द्वार खोले हैं, वहीं उनका अत्यधिक उपयोग बच्चों और किशोरों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है। यदि समय रहते प्रभावी और संतुलित कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर गहरा और दीर्घकालिक होगा। इसलिए सरकार, शैक्षणिक संस्थान, अभिभावक और समाज-सभी को मिलकर जागरूकता, संतुलित उपयोग और सकारात्मक संवाद के माध्यम से इस ‘डिजिटल जहर’ से बच्चों और युवाओं को बचाने की दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे।

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पाकिस्तान में 458 रुपये पहुंचे पेट्रोल के रेट… भारत में अब तक नहीं बढ़ी कीमतें https://aajkhabar.in/business/petrol-prices-in-pakistan-reach/ https://aajkhabar.in/business/petrol-prices-in-pakistan-reach/#respond Sat, 04 Apr 2026 06:05:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/04/petrol-prices-in-pakistan-reach/ नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price Today) में आज फिर कोई...

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नई दिल्ली।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price Today) में आज फिर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर के रेट से बिक रहा है। वहीं, डीजल का रेट दिल्ली में आज शनिवार को 87.67 रुपये प्रति लीटर है। बता दें, दुनिया भर में इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में जारी तेजी की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, घरेलू स्तर पर भारत सरकार ने आम-आदमी को अबतक इससे बचा कर रखा है।


पाकिस्तान में 458 रुपये प्रति लीटर बिक रहा पेट्रोल

पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ाने की घोषणा की। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में क्रमश: 43 प्रतिशत और 55 प्रतिशत की भारी बढोतरी की है। इस फैसले के तहत, पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये से 137.23 रुपये प्रति लीटर (करीब 42.7 प्रतिशत) बढ़ाकर 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। वहीं, हाई स्पीड डीजल की कीमत 335.86 रुपये से 184.49 रुपये प्रति लीटर (करीब 55 प्रतिशत) बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इसके साथ, केरोसिन तेल की कीमत भी 34.08 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 457.80 रुपये कर दी गई है।


देश के अलग-अलग शहरों में किस रेट पर बिक रहा पेट्रोल (Petrol Rate)

दिल्ली – 94.77 रुपये
मुंबई – 104.21 रुपये
कोलकाता – 103.94 रुपये
चेन्नई – 100.75 रुपये
अहमदाबाद – 94.49 रुपये
बेंगलुरू – 102.92 रुपये
हैदराबाद – 107.46 रुपये
जयपुर – 104.72 रुपये
लखनऊ – 94.69 रुपये
पुणे – 104.04 रुपये
चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
इंदौर – 106.48 रुपये


डीजल का क्या है अलग-अलग शहरों में रेट (Diesel Rate)

मुंबई – 92.15 रुपये
कोलकाता – 90.76 रुपये
चेन्नई – 92.34 रुपये
अहमदाबाद – 90.17 रुपये
बेंगलुरू – 89.02 रुपये
हैदराबाद – 95.70 रुपये
जयपुर – 90.21 रुपये
लखनऊ – 87.80 रुपये
पुणे – 90.57 रुपये
चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
इंदौर – 91.88 रुपये
पटना – 93.80 रुपये

पिछले दिनों प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इंडियन ऑयल ने इजाफा किया था। जिसके बाद दिल्ली में XP100 पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल का रेट 91.49 रुपये से 92.99 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

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भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं…. सरकार का दावा – देश में दो माह का भंडार मौजूद https://aajkhabar.in/national/no-shortage-of-crude-oil-in-india-government/ https://aajkhabar.in/national/no-shortage-of-crude-oil-in-india-government/#respond Fri, 03 Apr 2026 06:49:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/03/no-shortage-of-crude-oil-in-india-government/ नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी आशंकाओं...

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नई दिल्ली।
पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी आशंकाओं के बीच सरकार रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस बीच, सरकार का कहना है कि देश में कच्चे तेल (Crude oil) की कोई कमी नहीं है। रिफाइनरी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सरकार का दावा है कि करीब दो माह का कच्चा तेल मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत (India) के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है।

उन्होंने कहा कि सभी घरों को ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक माह में तीन लाख 33 हजार पीएनजी कनेक्शन दिए गए। इनमें से दो लाख नब्बे हजार पीएनजी कनेक्शन घरेलू हैं। वहीं, करीब साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की अपील पर 14 हजार चार सौ उपभोक्ताओं ने अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है। सुजाता शर्मा ने अपील करते हुए कहा कि पीएनजी कनेक्शन इस्तेमाल करने वाले दूसरे उपभोक्ता भी अपना एलपीजी कनेक्शन को वापस कर दे।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने व्यवसायिक गतिविधियों व औद्योगिक मांग को सुचारू बनाए रखने के लिए आठ राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के कोटे में दस फीसदी अतिरिक्त बढ़ोतरी की भी घोषणा की। सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार है।


भारत समुद्र में प्रतिबंधों के खिलाफ

होर्मुज जलमार्ग के मुद्दे पर ब्रिटेन द्वारा आहूत बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में बिना किसी रुकावट के आवागहन की नीति पर भारत का पक्ष रखा। भारत ने स्पष्ट तौर पर इस संकट से निकलने के लिए तनाव कम करने और कूटनीति रास्ता निकालने पर जोर दिया। ब्रिटेन द्वारा गुरुवार को बुलाई गई इस बैठक में 60 देशों ने हिस्सा लिया। बैठक वर्चुअल तरीके से हुई जिसमें होर्मुज को खोलने के लिए एक गठबंधन बनाने की दिशा में प्रगति होती हुई दिखी।

विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बैठक को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि बैठक में विदेश सचिव मिसरी ने समुद्री परिवहन की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बिना किसी रुकावट के आने जाने के सिद्धांत के महत्व को रेखांकित किया।


ईरान जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा

बैठक में ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने कहा कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि हार्मुज को खोलने के लिए सैन्य आपरेशन के बजाय कूटनीतिक तरीके खोजने होंगे। बैठक को होर्मुज पोतों की सुरक्षित निकासी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की शुरुआती पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें 28 देशों के भाग लेने की उम्मीद थी लेकिन कहीं ज्यादा 48 देशों ने हिस्सा लिया है।

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