Russia Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/tag/russia/ News website Fri, 10 Apr 2026 08:33:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://aajkhabar.in/wp-content/uploads/2026/03/cropped-cropped-aajkhabar-Logo04-32x32.png Russia Archives - aajkhabar.in https://aajkhabar.in/tag/russia/ 32 32 रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप https://aajkhabar.in/international/britain-makes-major-allegation-against-russia-accuses-it-of-attempting-to-target-europes-cables-and-pipelines/ https://aajkhabar.in/international/britain-makes-major-allegation-against-russia-accuses-it-of-attempting-to-target-europes-cables-and-pipelines/#respond Fri, 10 Apr 2026 08:33:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/10/britain-makes-major-allegation-against-russia-accuses-it-of-attempting-to-target-europes-cables-and-pipelines/ नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब यूरोप में रूस को...

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब यूरोप में रूस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि रूसी पनडुब्बियों ने समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे ब्रिटिश और नॉर्वेजियन सेनाओं ने संयुक्त अभियान के जरिए विफल कर दिया।

रूस की कथित गतिविधियों पर ब्रिटेन की नजर

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने दावा किया कि रूस की यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और इसमें युद्धपोत सैन्य विमान और कई पनडुब्बियां शामिल थीं। उनके अनुसार यह अभियान करीब दो महीने तक चला जिसे निगरानी और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई के जरिए रोका गया।

समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान

ब्रिटिश रॉयल नेवी ने नॉर्वे के साथ मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जिसमें रूसी अटैक और जासूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। ब्रिटेन का कहना है कि जैसे ही उनकी निगरानी बढ़ाई गई रूसी इकाइयां पीछे हट गईं और मिशन छोड़ दिया।

कठोर परिणाम की चेतावनी
ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने रूस को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन लगातार इस क्षेत्र में रूस की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

रणनीतिक महत्व की केबल्स और पाइपलाइन
ब्रिटेन के अनुसार जिन समुद्री केबल्स और पाइपलाइनों की सुरक्षा की जा रही है वे वैश्विक संचार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दावा किया गया है कि दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है जिससे इनकी सुरक्षा रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन जाती है।

रूस-नाटो तनाव के बीच बढ़ती टकराहट

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। दूसरी ओर अमेरिका में राजनीतिक हलकों में भी नाटो की भूमिका और यूरोपीय देशों की सुरक्षा जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज है जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता दिख रहा है।

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रूस भारत के लिए एक बार फिर मददगार साबित https://aajkhabar.in/discussion/russia-proves-helpful-to-india-once-again/ https://aajkhabar.in/discussion/russia-proves-helpful-to-india-once-again/#respond Wed, 01 Apr 2026 11:21:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/04/01/russia-proves-helpful-to-india-once-again/ – सौरभ वार्ष्णेयजब-जब भारत को जरूरत पड़ी, तब -तब रूस ने अपना मित्रता धर्म निभाया...

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– सौरभ वार्ष्णेय

जब-जब भारत को जरूरत पड़ी, तब -तब रूस ने अपना मित्रता धर्म निभाया है। वैश्विक राजनीति के जटिल दौर में, जब विश्व शक्तियों के बीच तनाव और प्रतिस्पर्धा चरम पर है, ऐसे समय में भारत के लिए रूस का एक बार फिर भरोसेमंद साझेदार के रूप में सामने आना बेहद महत्वपूर्ण है। यह केवल कूटनीतिक संबंधों का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक सहयोग है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया गैस कच्चे तेल की कमी से त्रस्त है तब 9 मार्च तक भारत का रूसी तेल आयात 5.55 करोड़ बैरल तक पहुंच गया है जो कि खरीद नौ महीने में सबसे अधिक है। भारत की तेल खरीद में अंगोला भी पिक्चर में आया है। उसकी सप्लाई में 255 फीसदी का भारी इजाफा हुआ है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। उसके कच्चे तेल के आयात का लगभग 40-50 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। सऊदी अरब से होने वाले आयात में फरवरी के मुकाबले 38 फीसदी की कमी आई। वहीं दूसरी ओर अंगोला से होने वाली खरीद में महीने-दर-महीने के आधार पर जबरदस्त 255 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। भारत की ओर से इराक से की जाने वाली खरीद में भी 73 फीसदी की कमी आई। यह घटकर 73 लाख बैरल रह गई। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात से होने वाली खरीद में भी 59 फीसदी की कमी आई। यह 64 लाख बैरल पर पहुंच गई।

भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं, जो समय-समय पर परखे गए और हर बार मजबूत होकर उभरे। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज के बहुध्रुवीय विश्व तक, रूस ने कई अहम मौकों पर भारत का साथ दिया है। आज जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच टकराव बढ़ा है, तब भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है।

ऊर्जा के क्षेत्र में रूस की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है। वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता के बीच रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली और आम जनता पर महंगाई का बोझ कुछ हद तक कम हुआ। यह सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार बनकर उभरा है।

रक्षा क्षेत्र में भी रूस भारत का प्रमुख सहयोगी रहा है। आधुनिक हथियारों, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग है। चाहे वह ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना हो या एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, रूस ने भारत की सैन्य क्षमता को सुदृढ़ करने में अहम योगदान दिया है।

हालांकि, इस संबंध में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते भुगतान तंत्र, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय दबाव जैसे मुद्दे सामने आए हैं। इसके बावजूद भारत ने अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए रूस के साथ सहयोग जारी रखा है।

आज जरूरत इस बात की है कि भारत और रूस अपने संबंधों को और अधिक विविध और आधुनिक बनाएं। केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित न रहकर, विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष और व्यापार के नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए। इससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकते हैं। यह कहा जा सकता है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में रूस का भारत के लिए मददगार बनकर उभरना न केवल द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का संकेत है, बल्कि यह भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति की सफलता का भी प्रमाण है।

भारत-रूस मित्रता बहुत पुरानी

भारत और रूस के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विश्वास, रणनीतिक सहयोग और परस्पर सम्मान पर आधारित हैं। यह मित्रता दशकों पुरानी है और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बावजूद निरंतर मजबूत होती रही है। शीत युद्ध के दौर में, जब विश्व दो ध्रुवों में बंटा हुआ था, तब सोवियत संघ ने भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर साथ दिया। चाहे 1971 के युद्ध का समय हो या औद्योगिक विकास की शुरुआत, सोवियत समर्थन ने भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती दी। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध केवल हितों तक सीमित नहीं, बल्कि भरोसे की नींव पर टिके हैं।

आज के दौर में भी, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग बेहद अहम है। भारत की रक्षा प्रणाली में रूस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, वहीं ऊर्जा क्षेत्र में भी रूस एक विश्वसनीय भागीदार बना हुआ है। वैश्विक तनावों और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भी भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए रूस के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। हालांकि, बदलती वैश्विक राजनीति में नई चुनौतियां भी सामने हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंध, और रूस का चीन के साथ समीकरण, इस मित्रता के लिए नई जटिलताएं पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद, भारत की विदेश नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित है, जो उसे सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन बनाने में सक्षम बनाती है।

वर्तमान समय में भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने की आवश्यकता है। केवल रक्षा तक सीमित न रहकर, व्यापार, निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना होगा। इससे यह मित्रता और अधिक व्यापक और टिकाऊ बन सकेगी। भारत-रूस मित्रता केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का भी आधार है। यह संबंध समय की हर परीक्षा में खरा उतरा है और आने वाले वर्षों में भी वैश्विक स्थिरता और संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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पश्चिम एशिया संकट के बीच रूस से भी LPG खरीदेगा भारत… सरकार ने दिए संकेत https://aajkhabar.in/national/amid-the-west-asia-crisis-india-will-also-buy-lpg/ https://aajkhabar.in/national/amid-the-west-asia-crisis-india-will-also-buy-lpg/#respond Fri, 20 Mar 2026 06:09:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/03/20/amid-the-west-asia-crisis-india-will-also-buy-lpg/ नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) के बीच पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil)...

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नई दिल्ली।
ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) के बीच पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) का संकट पैदा होने लगा है। एलपीजी (LPG) की भी दिक्कतें आने लगी हैं। इस बीच, एलपीजी को लेकर भारत सरकार (Government of India) ने गुरुवार को बड़े संकेत दिए हैं। विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया कि क्या भारत रूस से एलपीजी खरीद रहा है, इस पर सरकार ने कहा कि अगर रूस में उपलब्ध होगी, तो वहां से खरीदी जाएगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि क्या हम रूस से एलपीजी खरीद रहे हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया, ”एलपीजी हम सभी जगह से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जहां वह उपलब्ध है। अगर उसमें रूस भी होगा, तो वहां भी जाएंगे, क्योंकि स्थिति अभी इस प्रकार की है। हमें सुनिश्चित करना है कि हमारे लोगों का ईंधन की जरूरतें हैं, वह पूरा हो। कई देश हैं, जहां से एलपीजी खरीद रहे हैं। अभी इन देशों का ब्योरा नहीं है, यह सब पेट्रोलियम मंत्रालय ज्यादा जानकारी देगा, लेकिन हम चाहते हैं कि विकल्प हमारे पास कई हों।”


‘तेल और गैस के कुंओं तथा रिफाइनरियों पर हमले चिंताजनक’

भारत ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के कुंओं तथा तेल रिफाइनरियों पर हमलों को अत्यंत चिंताजनक बताया है। सरकार ने कहा है कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और हमले तुरंत रोके जाने चाहिए। पिछले कुछ दिनों में ईरान-अमेरिका जंग और भीषण हुई है। ईरान ने कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों के कई तेल कुओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। अमेरिका-इजरायल ने भी ईरानी तेल सुविधाओं पर हमले किए हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में गुरुवार को कहा कि भारत ने यह संघर्ष शुरू होने पर ही कहा था कि नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ,” भारत ने पहले ही पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हालिया हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और ये पूरे विश्व के पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अस्थिर करते हैं। ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।”

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट और तेल-एलएनजी आयात की चुनौतियां https://aajkhabar.in/international/indias-energy-security-the-strait-of-hormuz-and-the-challenges-of-oil-and-lng-imports/ https://aajkhabar.in/international/indias-energy-security-the-strait-of-hormuz-and-the-challenges-of-oil-and-lng-imports/#respond Wed, 18 Mar 2026 12:02:00 +0000 https://aajkhabar.in/2026/03/18/indias-energy-security-the-strait-of-hormuz-and-the-challenges-of-oil-and-lng-imports/ नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर...

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। भारत अपनी सीक्रेट डिप्लोमेसी और रणनीतिक कदमों के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिशों में लगा है। हालात ऐसे हैं कि अमेरिका को नाटो देशों से अपील करनी पड़ रही है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजें।

भारत ने इस चुनौती के बीच भी अपने दो तेल टैंकर शिप्स को होर्मुज स्ट्रेट से निकालकर भारतीय समुद्री तट पर पहुंचा दिया है जबकि कई अन्य शिप्स की वापसी की संभावना बनी हुई है। भारत लगभग 85-89 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसमें से पहले लगभग 55 फीसदी तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता था। अब यह आंकड़ा लगभग 70 फीसदी तक बढ़ गया है। भारत की दैनिक तेल खपत लगभग 55 लाख बैरल है और यह तेल लगभग 40 देशों से आयात किया जाता है।

भारत का कच्चा तेल मुख्य रूप से रूस इराक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आता है। इसके अलावा अमेरिका से तेल आयात बढ़ा है। खाड़ी और मिडिल ईस्ट में कुवैत कतर ओमान और मिस्र; अफ्रीका में नाइजीरिया अंगोला लीबिया और अल्जीरिया; अमेरिका महाद्वीप में कनाडा मेक्सिको और ब्राजील; मिडिल एशिया में कजाकिस्तान और अजरबैजान भारत के तेल आपूर्तिकर्ता हैं।

प्राकृतिक गैस की बात करें तो भारत की कुल खपत लगभग 189 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है जिसमें से घरेलू उत्पादन 97.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है। अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण लगभग 47.4 मिलियन घन मीटर की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

रसोई गैस में भारत लगभग 60 फीसदी आयात पर निर्भर है। इस आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। हालात प्रभावित होने के बावजूद घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 फीसदी की वृद्धि कर इसे संतुलित किया गया है। भारत मुख्य रूप से कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से एलपीजी आयात करता है जबकि अमेरिका भी इस सूची में शामिल हो गया है।

एलएनजी में भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता कतर है जिससे कुल एलएनजी का 47-50 फीसदी आता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ओमान नाइजीरिया अंगोला ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी एलएनजी आती है।

विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट इसलिए इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया के तेल और गैस व्यापार का मुख्य मार्ग है। यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल व गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

भारत ने रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय सहयोग के जरिए भारतीय समुद्री शिप्स को सुरक्षित मार्ग मुहैया कराया जा रहा है।

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