देश में गहराया LPG संकट: बिहार में बढ़ी लकड़ी-कोयले की मांग, राजस्थान के होटल लकड़ी पर बना रहे खाना; कई राज्यों में गोदामों पर छापे
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में लोग रात से ही गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर के इंतजार में बैठे रहे। कई जगहों पर घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर की कालाबाजारी भी सामने आई है। करीब 2000 रुपए का कॉमर्शियल सिलेंडर कुछ इलाकों में 4000 रुपए तक बेचा जा रहा है। जमाखोरी की शिकायतों के बाद सरकार ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में गैस गोदामों पर छापेमारी शुरू कर दी है।
पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है।पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है। तेज धूप में घंटों इंतजार करने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
हरियाणा में गैस डिलीवरी में 20 से 25 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन बुकिंग और फोन कॉल का जवाब नहीं मिलने से लोग सीधे एजेंसियों पर पहुंचकर सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण होटल और ढाबा संचालक इंडक्शन हीटर खरीदने लगे हैं। दुकानदारों के अनुसार पहले हफ्ते में एक-दो इंडक्शन बिकते थे, लेकिन अब रोज 8 से 15 तक बिक रहे हैं।
इस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के अधिकारियों की हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की निगरानी कर रही है। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू किया गया है। सिलेंडर की डिलीवरी में OTP और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियम भी बदल दिए हैं। अब एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिन कर दिया गया है। वहीं सभी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है और उत्पादन में करीब 28% तक बढ़ोतरी की गई है।
इसके बावजूद जमीनी हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें बनी हुई हैं और होटल-ढाबा संचालकों ने खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक एलपीजी सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है।