भोपाल के हमीदिया अस्पताल में फायरिंग: गोलियां चलती रहीं, पुलिसकर्मी अंदर ही रहे, पुरानी गैंगवार का खुला राज
सुबह करीब 6:30 बजे, एक्टिवा सवार तीन युवक अस्पताल के गेट पर पहुंचे। एक के हाथ में चाकू था, दूसरे के हाथ में पिस्टल, जबकि तीसरा आरोपी गाड़ी पर बैठा रहा। दोनों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की और इसके बाद आरोपी फरार हो गए। गोलियों से घायल हुए व्यक्ति को तुरंत गार्ड्स ने अंदर ले लिया। इस दौरान इमरजेंसी वार्ड में तैनात पुलिसकर्मी बाहर नहीं निकले। वारदात महज डेढ़-दो मिनट में संपन्न हुई, और अस्पताल परिसर में भय का माहौल बन गया।
घटना के तुरंत बाद हिस्ट्रीशीटर लल्लू रईस ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि फायरिंग के दौरान अशोका गार्डन पुलिस मौके पर नहीं थी, जबकि गार्ड्स ने घायल की जान बचाई। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
कोहेफिजा थाने के प्रभारी केजी शुक्ला ने कहा कि हमीदिया अस्पताल में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था है और चार्ली दल की गश्त नियमित होती है। हालांकि इमरजेंसी वार्ड की आंतरिक सुरक्षा गार्ड्स की जिम्मेदारी है। पुलिस ने फायरिंग के बाद एफआईआर दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। अशोका गार्डन, कोहेफिजा और क्राइम ब्रांच की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह हमला पुरानी गैंगवार का हिस्सा था। लल्लू रईस के बेटे और शादाब कुरैशी के बीच दो साल पहले जुआ और सट्टे के अवैध कारोबार को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी का मकसद लल्लू रईस और उसके परिवार को निशाना बनाना था। वारदात के दौरान घायल इमरान रईस को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
यह घटना अस्पताल सुरक्षा और शहर में बढ़ती गैंगवार की गंभीरता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले मरीज और आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा हैं और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।