March 15, 2026

हाईटेक मोड में मिनी मुंबई की पुलिस: इंदौर के हर थाने में तैयार होंगे साइबर एक्सपर्ट, मौके पर ही सुलझेगी फ्रॉड की शिकायत

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इंदौर । इंदौर की पुलिस अब तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए हाईटेक रणनीति पर काम कर रही है। मिनी मुंबई के नाम से पहचाने जाने वाले इस शहर में पुलिस कमिश्नरेट ने फैसला लिया है कि अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो साइबर फ्रॉड की शिकायत मिलते ही मौके पर ही कार्रवाई कर सकें। इसका उद्देश्य यह है कि पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने या समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें तुरंत राहत मिल सके।

इसी योजना के तहत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में एक विशेष साइबर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न थानों से करीब 80 पुलिसकर्मियों को बुलाकर आधुनिक तकनीक और साइबर अपराध से निपटने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पुलिस कमिश्नर Santosh Kumar Singh के निर्देश पर किया गया, जिनका मानना है कि बदलते तकनीकी दौर में पुलिस को भी लगातार खुद को अपडेट रखना होगा।

पुलिस कमिश्नरेट की योजना के अनुसार थाना स्तर पर साइबर हेल्प डेस्क को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी या डिजिटल फ्रॉड होने पर वह सीधे थाने में जाकर शिकायत दर्ज करा सके और तत्काल कार्रवाई शुरू हो सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त Amit Singh और आर.के. सिंह सहित शहर के सभी डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी भी मौजूद रहे।

प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को यह सिखाया गया कि साइबर अपराध की शिकायत मिलते ही किस तरह त्वरित कार्रवाई की जाए। क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी Rajesh Dandotiya और उनकी तकनीकी टीम ने पुलिसकर्मियों को कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें 1930 हेल्पलाइन, cybercrime.gov.in पोर्टल, एनसीआरपी सिस्टम, संचार साथी, समन्वय, ई-DAR, निदान और साइबर पुलिस पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन पोर्टल्स के जरिए शिकायत मिलते ही ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है और जरूरत पड़ने पर पीड़ित के बैंक खाते से जुड़े लेन-देन को तुरंत होल्ड भी कराया जा सकता है।

प्रशिक्षण सत्र में यह भी बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तुरंत कार्रवाई की जाए तो ठगी की रकम को ट्रैक कर उसे वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से पुलिस अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करना चाहती है, जो तकनीकी प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए तत्काल कदम उठा सकें।

पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने इस दौरान कहा कि आज के डिजिटल दौर में अपराधी भी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस को उनसे एक कदम आगे रहना होगा। उनका लक्ष्य है कि शहर का हर थाना साइबर अपराधों से निपटने में सक्षम बने और कोई भी पीड़ित व्यक्ति थाने से निराश होकर वापस न लौटे।

कमिश्नरेट के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। आने वाले समय में इंदौर के प्रत्येक थाने में साइबर मामलों में दक्ष पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि शहर में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सके।

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