पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं? ओएमसी की रिफाइनरी कीमतों पर तैयारी और जनता को क्या मिलेगा फायदा
नई दिल्ली में पब्लिक सेक्टर की पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां यानी ओएमसी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पश्चिम एशिया संकट से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने के बावजूद ओएमसी को इस बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है।
इस परिस्थिति से निपटने के लिए ओएमसी अब रिफाइनरियों को कम दरों पर पेट्रोल और डीजल देने पर विचार कर रही हैं। विशेष रूप से रिफाइनरी ट्रांसपोर्टेशन शुल्क यानी आरटीपी पर रोक लगाने या उस पर छूट तय करने का विकल्प इस योजना का मुख्य हिस्सा है। आरटीपी वह इंटरनल प्राइस है, जिस पर रिफाइनरियां अपने मार्केटिंग सेगमेंट को ईंधन बेचती हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिफाइनरियां कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ मार्केटिंग कंपनियों पर न डाल सकें।
यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इस प्रस्तावित कदम से रिफाइनरियां आरटीपी के जरिये अपने बढ़े हुए खर्च का पूरा बोझ आगे नहीं बढ़ा पाएंगी और उन्हें इसका एक हिस्सा खुद वहन करना होगा। इस तरह ओएमसी को घाटा कम करने का अवसर मिलेगा और खुदरा कीमत स्थिर रखी जा सकेगी।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) जैसी एकीकृत कंपनियां इस घाटे की भरपाई अपने रिफाइनिंग और विपणन परिचालन के बीच कर सकती हैं। लेकिन मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल), चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) जैसी एकल रिफाइनरियों का खुदरा बाजार में योगदान सीमित है। ये कंपनियां अपना उत्पादन मुख्य रूप से ओएमसी को बेचती हैं, इसलिए उनके मार्जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार यदि यह आरटीपी पर रोक या छूट निजी रिफाइनरियों पर भी लागू होती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी निजी कंपनियां भी प्रभावित होंगी। ये कंपनियां अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा ओएमसी को बेचती हैं, इसलिए उनके लाभ में कमी आने की संभावना है।
इस पूरे कदम का मकसद जनता को सीधा फायदा पहुंचाना है, यानी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रह सकें। हालांकि रिफाइनरियों और निजी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका मतलब यह है कि आम लोग फिलहाल कीमतों की बढ़ोतरी से बचेंगे, लेकिन कंपनियों को घाटा सहना पड़ेगा।
इस योजना से यह साफ होता है कि ओएमसी सरकार और जनता की ओर से कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, जबकि रिफाइनरियों को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ेगा। अगर वैश्विक तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो यह कदम ओएमसी और रिफाइनरियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, लेकिन आम जनता के लिए फिलहाल राहत का संकेत है।