March 16, 2026

MP में दो दिन और झुलसाएगी गर्मी, 18-19 मार्च को बारिश के आसार; भोपाल में घरों पर ग्रीन नेट, सड़कों पर पसरा सन्नाटा

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मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगा है और लोग इससे बचने के लिए तरह तरह के उपाय करने लगे हैं। राजधानी भोपाल में कई घरों को तेज धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट से कवर किया जा रहा है, ताकि घरों के अंदर का तापमान ज्यादा न बढ़े। वहीं इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिन तक तेज गर्मी का असर बना रहेगा, जबकि 18 और 19 मार्च को मौसम में बदलाव के साथ कई जिलों में बारिश हो सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक रविवार को ग्वालियर चंबल क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिला। इसके चलते आसमान में बादल छाए रहे और तापमान में करीब 1.7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। हालांकि यह सिस्टम अब कमजोर पड़ चुका है। इसी वजह से 16 और 17 मार्च को प्रदेश में कहीं भी बारिश या बादलों का अलर्ट नहीं है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार 17 मार्च की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर मध्यप्रदेश में 18 और 19 मार्च को देखने को मिलेगा।

रविवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री, दतिया में 32.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 36 डिग्री, सिवनी में 35.6 डिग्री, मंडला में 37.2 डिग्री और बालाघाट में 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि शाम तक कहीं बारिश नहीं हुई, लेकिन बादल छाए रहने से तापमान में कुछ राहत मिली।

वहीं पिछले तीन दिनों से तीव्र गर्मी झेल रहे नर्मदापुरम में भी पारा कुछ नीचे आया और अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 36.4 डिग्री, इंदौर में 35.5 डिग्री, ग्वालियर में 32.6 डिग्री, उज्जैन में 35.5 डिग्री और जबलपुर में 35.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

तेज गर्मी के चलते राजधानी भोपाल को मार्च महीने में ही जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी करते हुए निजी ट्यूबवेल खनन पर रोक लगा दी है। अब केवल सरकारी ट्यूबवेल ही खोदे जा सकेंगे और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की नल जल योजनाओं को सुचारू रखने के लिए जरूरी काम किए जाएंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि बिना अनुमति ट्यूबवेल खनन करने पर दो साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही बोरवेल मशीनों के जिले से गुजरने पर भी रोक लगा दी गई है।

डॉक्टरों का कहना है कि मार्च का मौसम बीमारियों के लिहाज से भी संवेदनशील होता है। दिन में तेज गर्मी और सुबह शाम हल्की ठंड रहने से सर्दी जुकाम, एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ जाते हैं। कई लोग दिन की गर्मी से बचने के लिए हल्के कपड़े पहन लेते हैं और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए सुबह और देर रात की ठंडी हवा से बचने की सलाह दी गई है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को।

मौसम विभाग के अनुसार इस साल अप्रैल और मई में प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना है। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच सकता है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी का असर रहेगा।

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