March 16, 2026

बेंगलुरु कैफे में ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ का सनसनीखेज बिल, लेमनेड पर भी 5% अतिरिक्त शुल्क, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

0
p27-1773644535



नई दिल्ली। बेंगलुरु के थियो कैफे का एक बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने लोगों का ध्यान रेस्टोरेंट बिलिंग प्रैक्टिस और बढ़ती लागत की तरफ खींचा है। इस बिल में दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज जोड़ा गया, जो ग्राहकों के लिए चौंकाने वाला रहा। ग्राहक ने दो मिंट लेमनेड ऑर्डर किए, जिनकी कीमत 179 रुपये प्रत्येक थी। कुल सबटोटल 358 रुपये बनी, जिसमें पहले 5% डिस्काउंट (17.90 रुपये) लागू किया गया। इसके बाद स्टैंडर्ड GST (CGST 2.5% + SGST 2.5%) जोड़ा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिल में अतिरिक्त 5% गैस क्राइसिस चार्ज (17.01 रुपये) भी शामिल किया गया, जिससे अंतिम बिल 374 रुपये तक पहुंच गया।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बिल पर जमकर मज़ाक उड़ाया। कई ने टिप्पणी की कि “लेमनेड बनाने में कौन सी गैस लगी?” और “शायद लेमनेड को फिज़्जी बनाया गया होगा।” कुछ ने इसे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक प्रथा बताते हुए चेताया कि यदि ऐसे चार्ज अनिवार्य हैं, तो 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। अन्य यूजर्स ने कहा कि यदि यह वैकल्पिक होता, तो ग्राहक इसे समझ सकते थे, लेकिन अनिवार्य चार्ज अधिकारहीन और अनुचित माना जा रहा है।

पृष्ठभूमि: LPG संकट और बढ़ती लागत
देश के कई हिस्सों में LPG सिलेंडर की कमी ने रेस्टोरेंट्स और कैफे की लागत बढ़ा दी है। बेंगलुरु में भी कई स्थानों पर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे होटल और कैफे ग्राहकों से अलग से गैस चार्ज वसूल रहे हैं। हालांकि लेमनेड जैसी ड्रिंक आमतौर पर गैस पर नहीं बनाई जाती, लेकिन बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कुछ कैफे ने गैस क्राइसिस चार्ज लागू किया।

मिश्रित प्रतिक्रिया और बहस
कुछ लोगों ने कैफे का समर्थन किया, कहा कि गैस की कमी में यह समझदारी भरा कदम हो सकता है। वहीं, अधिकांश यूजर्स ने इसे ग्राहक हित और पारदर्शिता के खिलाफ बताया। सोशल मीडिया पर यह घटना कंज्यूमर राइट्स, बिलिंग पारदर्शिता, महंगाई और व्यवसाय की चुनौतियों पर बहस छेड़ने का कारण बनी है।

बेंगलुरु के थियो कैफे ने दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज लगाया।

बिल की कुल राशि 374 रुपये तक पहुंची, जिसमें डिस्काउंट और GST शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर इसे अनुचित व्यापारिक प्रथा और मज़ाक बताया गया।

बढ़ती LPG कमी और लागत ने रेस्टोरेंट्स को नए चार्ज लगाने पर मजबूर किया।

घटना ने कंज्यूमर राइट्स और बिलिंग पारदर्शिता पर बहस को जन्म दिया।

इस तरह, बेंगलुरु की यह घटना दिखाती है कि महंगाई, गैस संकट और सप्लाई चेन की चुनौतियाँ आम ग्राहकों तक कैसे सीधे असर डाल रही हैं, और व्यवसायों को अपने बिलिंग मॉडल में बदलाव करने पर मजबूर कर रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *