फतवा वायरल होने पर बढ़ा विवाद, मुस्लिम त्योहार कमेटी पहुंची थाने; शहर काजी को बदनाम करने की साजिश का आरोप
कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।कमेटी ने आरोप लगाया कि यह फतवा सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर काजी की छवि धूमिल करने और शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, पीरगेट निवासी सैयद सोहेल अली ने 6 मार्च 2026 को दारुल इफ्ता, मसाजिद कमेटी भोपाल से एक बीमारी के आधार पर फतवा मांगा था। इसके जवाब में 10 मार्च को फतवा जारी किया गया, जिस पर मुफ्ती-ए-शहर अब्दुल कलाम, मुफ्ती रईस और मुफ्ती जसीम दाद के हस्ताक्षर हैं।
कमेटी का कहना है कि यह फतवा मूल रूप से एक व्यक्तिगत दस्तावेज था, लेकिन पिछले एक-दो दिनों से इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद दानिश ने कहा कि “फतवा किसी व्यक्ति विशेष के लिए होता है, लेकिन उसे सार्वजनिक कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। यह एक साजिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य शहर काजी को पद से हटाना है।”
वहीं, संरक्षक शमशुल हसन ने मांग की कि फतवा लेने वाले, जारी करने वाले और उसे वायरल करने वाले—तीनों की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि ईद से ठीक पहले इस तरह की घटना समाज में आक्रोश पैदा कर सकती है।
कमेटी ने यह भी कहा कि परंपरा के अनुसार ईद पर शहर काजी ही ईदगाह में नमाज अदा कराते हैं, ऐसे में इस समय फतवा वायरल होना कई सवाल खड़े करता है और माहौल बिगड़ने की आशंका बढ़ा रहा है।
उधर, शाहजहांनाबाद थाना प्रभारी यूपीएस चौहान ने बताया कि कमेटी की शिकायत मिल गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि फतवा सोशल मीडिया पर किसने वायरल किया।
साथ ही पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि ईद को देखते हुए शहर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।
