March 17, 2026

इकोनॉमी को मिला सहारा, भारतीय परिवारों की बचत 21.7% तक पहुंची: पंकज चौधरी

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नई दिल्ली।देश की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय परिवारों की बचत में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary ने राज्यसभा में बताया कि नई जीडीपी सीरीज (बेस ईयर 2022-23) के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू बचत बढ़कर जीडीपी के 21.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में यह 20 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि देश के परिवार आर्थिक रूप से अधिक मजबूत हो रहे हैं और भविष्य के लिए बेहतर वित्तीय योजना बना रहे हैं।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी घरेलू बचत

मंत्री ने कहा कि घरेलू परिवारों की बचत देश में निवेश के लिए सबसे बड़ा स्रोत होती है। यही बचत आगे चलकर विभिन्न सेक्टरों में निवेश को बढ़ावा देती है, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार लगातार ऐसी नीतियां लागू कर रही है, जिनसे लोगों की आय बढ़े और बचत की क्षमता मजबूत हो। इसमें व्यापार करने में आसानी, कौशल विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं। इन पहलों से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।

टैक्स छूट और जीएसटी सुधार से बढ़ेगी आमदनी

सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कुछ अहम फैसलों का भी इस वृद्धि में बड़ा योगदान माना जा रहा है। Pankaj Chaudhary ने बताया कि 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर आयकर छूट और जीएसटी दरों के युक्तिकरण से लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ेगी। इसका सीधा असर उपभोग, बचत और निवेश पर पड़ेगा। साथ ही इससे लोगों की कर्ज पर निर्भरता भी कम होगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

महंगाई पर भी राहत, खाद्य कीमतों में गिरावट

सरकार ने महंगाई के मोर्चे पर भी राहत की बात कही है। मंत्री के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य और ईंधन क्षेत्र में महंगाई नहीं रही। खासतौर पर खुदरा खाद्य कीमतों में अप्रैल से जनवरी के बीच औसतन -0.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 7.3 प्रतिशत थी। वहीं थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के अनुसार ईंधन मुद्रास्फीति भी (-)3.16 प्रतिशत रही। यह गिरावट वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में कमी का असर भी दर्शाती है।

वैश्विक हालात का असर और आगे की चुनौती

हालांकि सरकार ने यह भी माना कि वैश्विक परिस्थितियां अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे आने वाले समय में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। खाद्य महंगाई भी मानसून, मौसम, आपूर्ति श्रृंखला और कृषि लागत जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है, जिससे इसमें उतार-चढ़ाव बना रहता है।

क्या कहते हैं संकेत

कुल मिलाकर, भारतीय परिवारों की बढ़ती बचत देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। यह न केवल निवेश को मजबूती देती है, बल्कि आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ाती है। अगर सरकार की नीतियां इसी तरह प्रभावी रहीं, तो आने वाले वर्षों में बचत और निवेश दोनों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

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