नर्मदापुरम में शर्मनाक स्वास्थ्य व्यवस्था: एंबुलेंस नहीं चली, ग्रामीणों ने खुद धक्का दिया, घायल की मौत
जानकारी के अनुसार ग्राम माना के पास दो बाइकों की आमने सामने भिड़ंत हुई जिसमें राजेश मालवीय और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। तत्काल 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया लेकिन गाड़ी मौके पर नहीं पहुंची। परिजन निजी वाहन से घायलों को लगभग 10 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें नर्मदापुरम जिला अस्पताल रेफर किया। जब परिजनों ने एंबुलेंस से ले जाने को कहा तो अस्पताल स्टाफ ने गाड़ी खराब होने का बहाना दिया। इसके बाद ग्रामीण भड़क गए और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। तनाव बढ़ते देख पुलिस मौके पर पहुंची।
भारी दबाव के बाद एंबुलेंस में घायलों को रखा गया लेकिन वाहन स्टार्ट नहीं हुआ। अंततः ग्रामीणों ने खुद गाड़ी को धक्का दिया जिससे एंबुलेंस रवाना हो सकी। इस देरी के दौरान राजेश मालवीय की मौत हो गई।
हैरानी की बात यह है कि यह एंबुलेंस विधायक निधि से दान की गई थी। 108 एंबुलेंस के जिला प्रबंधक ने स्पष्ट किया कि वाहन उनके विभाग का नहीं है और इसकी देखरेख बीएमओ BMO माखननगर की जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एंबुलेंस में अक्सर डीजल नहीं होता या बैटरी खराब रहती है।इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है और एक परिवार का चिराग बुझा दिया। गंभीर घायल को समय पर उचित इलाज नहीं मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमियों को सामने लाता है।
