March 18, 2026

मध्य पूर्व तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा, ऑल-टाइम लो पर पहुंचा

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नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 92.50 का स्तर तोड़ते हुए 92.634 पर पहुंच गया। यह अब तक का नया ऑल टाइम लो है। इससे पहले रुपए का सुप्रीम गिरावट स्तर 92.4750 था।

सत्र की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रुपए के 92.402 पर खुलने के साथ हुई थी, लेकिन दिन के दौरान रुपया लगातार कमजोर हुआ और अंत में नए निचले स्तर पर बंद हुआ। दिन में रुपया न्यूनतम 92.334 और सुप्रीम 92.643 को दिलाने में सफल रहा।

रुपया कमजोर होने के प्रमुख कारण

विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में संघर्ष और वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि है। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति टमाटर के पार जा चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे बढ़ती कीमतों का सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में पिछले एक महीने में 50 प्रतिशत से ज़्यादा की तेज़ी देखी गई है। अभी में ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि इम्पोर्ट बिल में लगातार बढ़ोतरी के दबाव के चलते रुपया 92.60 के नीचे फिसल गया। उन्होंने आगे बताया कि होर्मुज जलदमरूमध्य में माल ढुलाई पर रुकावटें और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए इम्पोर्ट लागत में लगातार बढ़ोतरी का कारण बन रही हैं।

अमेरिकी नीतिगत फैसले पर नजर

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले डॉलर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके परिणामस्वरूप रुपए के उतार-चढ़ाव में बढ़ोतरी हो सकती है।

निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपया 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में रहने की उम्मीद तय जा रही है। बाजार में निवेशक और व्यापारी इस पर बढ़ोतरी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव और तेल की ऊंची कीमतें रुपया दबाव में रख सकती हैं।

बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो 92.634 पर पहुंच गया। मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें इसके मुख्य कारण हैं। विश्लेषकों का रुझान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से रुपया निकट भविष्य में 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में बने रहने की संभावना है। भारत की तेल आयात निर्भरता और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट रुपये के दबाव को और बढ़ा रहा है।

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