नवरात्र में सफेद नमक वर्जित, लेकिन सेंधा नमक क्यों खाते हैं भक्त, जानिए क्या है कारण?
साधारण नमक और सेंधा नमक में अंतर
धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टिकोण से साधारण नमक और सेंधा नमक में काफी अंतर है। साधारण नमक जो समुद्री नमक भी कहलाता है कई रासायनिक और मशीनी प्रक्रियाओं से गुजरता है। इस कारण इसे व्रत के लिए शुद्ध नहीं माना जाता। वहीं सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से हिमालय की चट्टानों से निकाला जाता है और इसे शुद्ध नमक मानकर व्रत में उपयोग किया जाता है।
सेंधा नमक शुद्ध और सात्विक
हिंदू धर्म में व्रत का उद्देश्य केवल भोजन पर नियंत्रण नहीं बल्कि मन को भगवान की भक्ति में लगाना और सात्विक जीवन जीना भी है। साधारण नमक कृत्रिम माना जाता है जबकि सेंधा नमक स्वयं सिद्ध और सात्विक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार सेंधा नमक शरीर में शीतलता बनाए रखता है और मन को शांत करता है। ध्यान और पूजा के समय शरीर और मन का सात्विक होना जरूरी होता है इसलिए व्रत में सेंधा नमक का महत्व बढ़ जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो व्रत के दौरान अनाज या सामान्य भोजन कम लेने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। सफेद नमक की तुलना में सेंधा नमक में मैग्नीशियम पोटेशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। इस कारण व्रत के दौरान भोजन में सेंधा नमक का उपयोग स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि नमक का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए।
