धुरंधर 2 रिव्यू: रणवीर सिंह का जलवा बरकरार, लेकिन पहले पार्ट की तरह धमाका नहीं
नई दिल्ली । रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज रिलीज हो चुकी है और पहले पार्ट की सफलता के बाद इस फिल्म को लेकर हाइप तो जबरदस्त था। दर्शकों ने एडवांस बुकिंग कर अपनी वफादारी दिखाई लेकिन कुछ शहरों में प्रीव्यू शोज़ कैंसल होने से निराशा भी हुई। जो लोग फिल्म देखने पहुंचे उनके लिए अनुभव मिला लेकिन पूरी तरह संतोषजनक नहीं।
कहानी
फिल्म की कहानी छह चैप्टर में बंटी है। शुरुआत में जसकीरत सिंह रांगी रणवीर सिंह और उसके परिवार की पृष्ठभूमि दिखाई जाती है। पिता भी फौजी थे और जसकीरत भी फौज में भर्ती होने वाला था लेकिन परिवार की रक्षा के लिए उसे बंदूक उठानी पड़ती है। अपनी खुद की जंग लड़ते हुए जसकीरत देश के लिए एजेंट बनता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी के रूप में काम करता है।
पहले पार्ट की कहानी रहमान डकैत अक्षय खन्ना की मौत पर खत्म हुई थी। इस पार्ट में जसकीरत हमजा उसका भाई उजैर दानिश पंडोर को सत्ता में बैठाकर अपने मिशन में आगे बढ़ता है। मेजर इकबाल अर्जुन रामपाल उसे उसके बड़े साहब से मिलवाते हैं जिससे कहानी आगे बढ़ती है।
अभिनय
रणवीर सिंह पूरे चार घंटे स्क्रीन पर छाए रहते हैं। उनके एक्शन इमोशन और गुस्से के सीन परफेक्ट हैं। अर्जुन रामपाल को अधिक स्क्रीन स्पेस मिला है लेकिन उनके किरदार में उतनी गहराई नहीं। संजय दत्त और सारा अर्जुन के सीन सीमित हैं जबकि माधवन और राकेश बेदी बीच-बीच में फिल्म में जान डालते हैं।
निर्देशन
आदित्य धर का रिसर्च और डिटेल्ड वर्क काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने नोटबंदी अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम का कनेक्शन कहानी में जोड़ा है। लेकिन पहले पार्ट के मुकाबले इस बार कहानी में सरप्राइज एलिमेंट कम हैं और कई सीन लंबी खींची गई लगती हैं। शुरुआत और क्लाइमैक्स दमदार हैं लेकिन बीच का हिस्सा थोड़ा धीमा और अनुमानित लगता है।
संगीत
संगीत
संगीत इस बार पहले पार्ट जितना प्रभावशाली नहीं। एक-दो गाने छोड़कर बाकी यादगार नहीं हैं और रोमांटिक सॉन्ग थोड़े जबरन ठूंसे हुए लगते हैं।
देखें या नहीं
देखें या नहीं
अगर आपने पहला पार्ट देखा है तो यह जरूर देखें। हाइप या सेलेब्स के रिव्यू से प्रभावित न हों। फिल्म ठीक-ठाक एंटरटेनमेंट देती है लेकिन पहले पार्ट जैसी रोमांचक सरप्राइज और दमदार कहानी की उम्मीदें कम रखें।
