रिपोर्ट में खुलासा, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अगले चार वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी
रिपोर्ट में बताया गया है कि क्विक कॉमर्स बिजनेस का सकल व्यापार मूल्य (GMV) 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 25 अरब डॉलर के पार जा सकता है। इसका मुख्य कारण है तेजी से डिलीवरी, सुविधा और बार-बार खरीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति। आज के समय में 10-15 मिनट में डिलीवरी का ट्रेंड फार्मासिस्ट को आकर्षित कर रहा है, जिससे ऑन-डिमांड खपत तेजी से बढ़ रही है। देश के 250 से ज़्यादा शहरों में 5 करोड़ से ज़्यादा मासिक कमाने वालों के साथ, इस दूध की पैकेज्ड फ़ूड मार्केट में भी 2030 तक 4 प्रतिशत से बढ़कर 15-20 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है।
बदले हुए लाइफस्टाइल और हेल्थ ट्रेंड्स से जहाँ मांग
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बदले हुए लाइफस्टाइल और कंज्यूमर रहने वालों ने इस बढ़ोतरी को और गति दी है। खासकर युवा वर्ग अब प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और मोटापे से जूझने वालों की ओर तेज़ी से झुक रहा है। पैकेज्ड फ़ूड में ‘क्लीन लेबल’ और हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा, छोटे परिवार, व्यस्त लाइफस्टाइल और समय की कमी के चलते रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट दूध भी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
मृगांक गुटगुटिया ने इस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्विक कॉमर्स अब एक ‘संरचनात्मक शक्ति’ के रूप में उभर रहा है, जो न केवल डिस्ट्रीब्यूशन बल्कि प्रोडक्ट बढ़ाना, कैटेगरी स्ट्रेटेजी और निवेश को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनियां अब उपभोक्ता की तत्काल आमदनी और हेल्थ ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं।
स्वास्थ्य पर केंद्रित पेय पदार्थों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। चीजों पर प्रोटीन आधारित ड्रिंक्स और पैकेटबंद नारियल पानी जैसे विकल्पों को उपभोक्ता पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, क्विक कॉमर्स और बदले हुए उपभोक्ता आदत का मेल भारत के पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट को नई मजबूती तक पहुंचाने के लिए तैयार है।
