इंडियन आइडल में अभिजीत भट्टाचार्य ने खोली सच्चाई गायक और अभिनेता के क्रेडिट पर बड़ा सवाल
अक्सर यह देखा जाता है कि दर्शक किसी गाने को उस अभिनेता से जोड़ लेते हैं जो स्क्रीन पर नजर आता है. जबकि असल में उस गाने के पीछे एक प्लेबैक सिंगर की मेहनत और आवाज होती है. यही कारण है कि कई बार गायकों को यह महसूस होता है कि उनका योगदान उतना नहीं पहचाना जाता जितना होना चाहिए. इसी मुद्दे पर अभिजीत भट्टाचार्य ने अपने अंदाज में टिप्पणी करते हुए ध्यान खींचा.
शो में होस्ट आदित्य नारायण ने जब उनसे पूछा कि क्या अभिनेता गानों का ज्यादा क्रेडिट ले जाते हैं तो अभिजीत ने हल्के अंदाज में कहा कि अभिनेता बहुत अच्छा गाते हैं लेकिन असली फर्क यह है कि गायक दिल से गाते हैं. उनके इस बयान ने वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी लेकिन साथ ही एक गहरी बात भी सामने रख दी. उन्होंने यह संकेत दिया कि गायक अपनी भावनाओं और आत्मा को अपनी आवाज के जरिए गाने में डालते हैं जो उसे खास बनाता है.
यह बयान केवल एक मजाक नहीं था बल्कि इसमें एक गंभीर संदेश भी छिपा था. अभिजीत भट्टाचार्य ने यह जताने की कोशिश की कि गाने की असली पहचान उसकी आवाज और भावनाओं से होती है. अभिनेता भले ही उस गाने को पर्दे पर जीवंत करता है लेकिन असली मेहनत उस व्यक्ति की होती है जिसने उसे गाया है.
इस बातचीत के दौरान एक और दिलचस्प पहलू सामने आया जब आदित्य नारायण ने बताया कि अभिजीत भट्टाचार्य और उनके पिता उदित नारायण ने लगभग पैंतीस साल पहले एक साथ डुएट गाना गाया था. यह सुनकर वहां मौजूद दर्शक भावुक हो गए और पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं. यह पल भारतीय संगीत के सुनहरे दौर की एक झलक भी पेश करता है.
अभिजीत भट्टाचार्य का करियर भी इस बात का प्रमाण है कि उनकी आवाज ने भारतीय फिल्म संगीत को एक अलग पहचान दी है. उन्होंने चांद तारे मैं कोई ऐसा गीत गाऊं और तौबा तुम्हारे इशारे जैसे कई सुपरहिट गाने दिए हैं जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं. उनकी गायकी में एक खास तरह की भावनात्मक गहराई होती है जो श्रोताओं को सीधे जोड़ती है.
इंडियन आइडल का आने वाला एपिसोड भी खास होने वाला है जिसमें 90 के दशक के दो दिग्गज गायक अभिजीत भट्टाचार्य और कविता कृष्णमूर्ति एक साथ नजर आएंगे. यह एपिसोड पुराने दौर के संगीत को याद करने और नई पीढ़ी को उस विरासत से जोड़ने का एक सुंदर प्रयास होगा. इस तरह के एपिसोड न केवल मनोरंजन करते हैं बल्कि संगीत की असली आत्मा को भी उजागर करते हैं.
