सोशल मीडिया के बिना भी खुशी, फिनलैंड लगातार नौवीं बार बना दुनिया का सबसे खुशहाल देश
नई दिल्ली। दुनिया भर में युवा सोशल मीडिया के बिना भी अधिक खुश और संतुष्ट महसूस कर रहे हैं। डिजिटल दुनिया के शोर और स्क्रीन टाइम से दूरी बनाने वाले 25 वर्ष से कम उम्र के युवा उन लोगों की तुलना में बेहतर जीवन स्तर का अनुभव कर रहे हैं जो घंटों सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं।ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर की विश्व खुशहाली रिपोर्ट-2026 में बताया गया है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं की खुशहाली पर नकारात्मक असर डाल रहा है।
अमेरिका और यूरोप के कॉलेज छात्र अब निजी तौर पर मानने लगे हैं कि वे सोशल मीडिया के बिना भी अधिक शांत और संतुलित जीवन जी सकते हैं जबकि कई इसे केवल सामाजिक मजबूरी के कारण उपयोग कर रहे हैं। रिपोर्ट में फिनलैंड लगातार नौवें वर्ष दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना। 147 देशों की रैंकिंग में भारत 116वें स्थान पर है जो 2025 की 118वीं रैंक से दो पायदान ऊपर है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में भी डिजिटल खपत और सामाजिक संबंधों के बीच असंतुलन युवाओं की खुशहाली को प्रभावित कर रहा है। जिन देशों में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध या सीमित उपयोग है वहां के युवा मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ और संतुष्ट हैं क्योंकि वे परिवार दोस्त और शारीरिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान दे पाते हैं।
डिजिटल दुनिया से युवाओं का मोहभंग
अमेरिका और अन्य देशों के कॉलेज छात्रों में सोशल मीडिया से दूरी बनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। कई छात्र महसूस करते हैं कि वे इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल केवल सामाजिक दबाव के चलते कर रहे हैं और वे ऐसी दुनिया को प्राथमिकता देंगे जहां सोशल मीडिया की आवश्यकता ही न हो।
अमेरिका कनाडा में गिरावट
आइसलैंड डेनमार्क स्वीडन और नॉर्वे जैसे नॉर्डिक देश शीर्ष-10 में शामिल रहे। वहीं अमेरिका कनाडा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 25 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के जीवन मूल्यांकन में पिछले एक दशक में गिरावट आई है। यह अध्ययन 140 देशों के लगभग 1 लाख लोगों के उत्तरों पर आधारित है।
खुशहाली केवल आर्थिक समृद्धि नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि खुशहाली सिर्फ आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं करती। नॉर्डिक देशों की सफलता के पीछे मजबूत कल्याणकारी प्रणाली समानता और लंबी जीवन प्रत्याशा है। इसके विपरीत अफगानिस्तान सिएरा लियोन और मलावी जैसे देश सूची में सबसे नीचे हैं।
फिनलैंड और कोस्टा रिका का मॉडल
फिनलैंड (1) और कोस्टा रिका (4) में लोग तकनीक से ज्यादा सामाजिक समानता प्रकृति और आपसी सहयोग को महत्व देते हैं। ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर जान-इमैनुअल डी नेवे के अनुसार यह उनके सामाजिक जीवन की गुणवत्ता और स्थिरता के कारण है जो उन्हें खुशहाल बनाती है।
