2033 तक भारत के ऊर्जा सेक्टर में बड़ा बदलाव, भंडारण क्षमता में होगा जबरदस्त इज़ाफा
## बीएसएस सेक्टर में तेजी
पिछले एक साल में BESS सेक्टर में जबरदस्त गति देखने को मिली। 69 नए टेंडर जारी किए गए, आर्किटेक्चर कुल क्षमता 102 GWh है, जो 2024 की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक है। यह निवेशक है कि व्यापारी और उद्योग दोनों ही इस क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को पहचान रहे हैं।
## पंपल्ड ऑटोमोबाइल स्टोरेज का विस्तार
केवल बैटरियों तक ही नहीं, बल्कि पंपल्ड सिलिकॉन एनर्जी स्टोरेज में भी बड़ा विस्तार होगा। अनुमान है कि इसकी क्षमता 2025 में 7 GW से बढ़कर 2033 तक 107 GW तक पहुंच जाएगी। इस बिजली से बिजली की मांग में उछाल- बिजली की आपूर्ति को बढ़ावा देना आसान होगा और बिजली की स्थिरता मजबूत होगी।
## लागत में कमी और नीति का समर्थन
बेरोजगार इंडिया के सुपरस्टार और एमडी, एस. सी. सक्सेना के अनुसार, बिजली की मांग में बदलाव के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडार की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बैटरी और पंपल्ड स्टोरेज की लागत में लगातार कमी और सरकार की सहायक कंपनियों के कारण इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
## गैर-जीवाश्मा जीवला लक्ष्य में सहायक
एआईएसए के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा कि यह भारत को 2030 से 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन (गैर-जीवाश्म ईंधन) क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा। ऊर्जा भंडारण इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा।
##सरकारी निगम का योगदान
इस सेक्टर की बिक्री में कई सरकारी अहम भूमिका निभा रही हैं। इनमें एनर्जी स्टोरेज ऑब्लिगेशन, वायबिलिटी गैप फंडिंग, और लाइब्रेरी चार्ज में छूट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। औद्योगिक निवेश आकर्षित हुआ है और सेक्टर में तेजी से विस्तार का अवसर मिला है।
## 2026 में नई क्षमता का उद्घाटन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 में करीब 5 GWh नई क्षमता शुरू होने की उम्मीद है। इससे भारत के ऊर्जा भंडारण सेक्टर का तेजी से विस्तार होगा और देश को वैश्विक ऊर्जा भंडारण बाजार में मजबूत खिलाड़ी बनाया जाएगा।
भारत का ऊर्जा सेक्टर सेक्टर अब विकास की ऊंचाइयों की ओर है। अगले दशक में प्रौद्योगिकी, सरकारी उद्यमों और उपभोक्ताओं के समर्थन से यह क्षेत्र देश के ऊर्जा लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएगा और वैश्विक स्तर पर भारत को बढ़त मिलेगी।
