March 20, 2026

सिंगरौली में टैक्स वसूली का सख्त अभियान: 7 दिन में बकाया नहीं चुकाया तो होगी संपत्ति कुर्की

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सिंगरौली । मध्य प्रदेश के सिंगरौली में नगर पालिक निगम ने संपत्ति कर के बकायादारों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। निगम के डिप्टी कमिश्नर आरपी बैस ने औद्योगिक कंपनियों और अन्य बकायादारों को नोटिस जारी करते हुए 7 दिन के भीतर बकाया कर जमा करने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं होने पर संबंधितों की चल-अचल संपत्ति की कुर्की कर वसूली की जाएगी।

नगर निगम के इस अभियान का मकसद लंबे समय से बकाया टैक्स वसूली को सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी करदाता इस मामले में अनदेखी नहीं कर पाएगा। इस अभियान के तहत एक दर्जन से ज्यादा बड़ी कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं जिसमें कई प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान शामिल हैं।

सूची में डीबीएल कंपनी निगाही पर 4,25,455 रुपये सिक्कल लॉजिस्टिक पर 8,72,328 रुपये पीसी पटेल पर 5,67,674 रुपये और राम किपाल कंपनी पर 2,26,025 रुपये बकाया शामिल हैं। वहीं कन्द्रोई ट्रांसपोर्ट पर 12,83,406 रुपये और विन्ध्या एग्रो इंडस्ट्री पर 12,62,43 रुपये का बकाया दर्ज है। देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड पर 8,85,524 रुपये बकाया है। इसके अलावा लोहिया एग्रो राइस मिल रुद्राक्ष हाईटेक विपिन कुमार जायसवाल शिवा इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम सहित अन्य कंपनियों का भी बकाया बताया गया है।

अन्य बकायादारों में विन्ध्या मेटल्स अब्दुल अहाद बाजार इंडिया होटल सागर नरेश कुमार शाह और सेंट जोसेफ स्कूल शामिल हैं जिन पर लाखों रुपये का टैक्स बकाया है। निगम ने स्पष्ट किया कि समयसीमा समाप्त होने पर चल और अचल संपत्तियों की कुर्की की जाएगी। इसमें बैंक खाते जमीन भवन और अन्य संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।

नगर निगम प्रशासन ने बताया कि यह अभियान केवल नोटिस तक सीमित नहीं है। यह सख्ती संदेश देने के लिए है कि नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से बकाया टैक्स की वसूली न होने से निगम की आय पर असर पड़ा था इसलिए इस बार अभियान तेज और कड़ा किया गया है।

इस कार्रवाई से न केवल निगम की आय में सुधार की उम्मीद है बल्कि अन्य करदाताओं के लिए भी एक चेतावनी बनकर सामने आया है कि समय पर भुगतान करना कितना जरूरी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नोटिस मिलने के बाद बकायादार कंपनियां बकाया जमा कराती हैं या निगम को कुर्की जैसी सख्त कार्रवाई करनी पड़ती है।

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