August 3, 2026

रूस बनाम टेलीग्राम: पावेल दुरोव पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, देश में एप पूरी तरह बैन होने की आशंका

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नई दिल्ली । रूस ने लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में शामिल कर दिया है। रूस की प्रमुख सुरक्षा एजेंसी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस ने दुरोव पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप लगाए हैं। एजेंसी का दावा है कि टेलीग्राम पर मौजूद कई चैनल, चैट और बॉट्स का इस्तेमाल यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों तथा चरमपंथी संगठनों द्वारा रूस में साइबर हमलों, तोड़फोड़ और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार टेलीग्राम प्रशासन को कई बार ऐसे अकाउंट और नेटवर्क हटाने के निर्देश दिए गए, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। इसी आधार पर पावेल दुरोव के खिलाफ नया मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद रूस में टेलीग्राम की सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना भी बढ़ गई है।

पावेल दुरोव मूल रूप से रूस के रहने वाले हैं और उन्हें तकनीकी दुनिया में रूस का मार्क जकरबर्ग भी कहा जाता है। उन्होंने टेलीग्राम लॉन्च करने से पहले रूस का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीके विकसित किया था। वर्ष 2014 में डेटा प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर रूसी सरकार से विवाद के बाद उन्होंने देश छोड़ दिया था। बाद में उन्होंने फ्रांस की नागरिकता प्राप्त कर ली और वर्तमान में दुबई से टेलीग्राम के वैश्विक संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि रूस में सरकारी सख्ती और पहले से लागू कई प्रतिबंधों के बावजूद टेलीग्राम बेहद लोकप्रिय बना हुआ है। आम नागरिकों के साथ सरकारी अधिकारी, पत्रकार, कारोबारी और कई सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोग भी इस प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करते हैं। यही कारण है कि यदि सरकार टेलीग्राम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है तो इसका असर करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है।

फेडरल सिक्योरिटी सर्विस का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को जवाबदेह होना होगा। एजेंसी के मुताबिक यदि कोई प्लेटफॉर्म आतंकवाद, साइबर अपराध या हिंसक गतिविधियों को रोकने में सहयोग नहीं करता तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

टेलीग्राम पहले भी कई देशों में विवादों का सामना कर चुका है। डेटा सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और अवैध गतिविधियों से जुड़े मामलों को लेकर अलग-अलग सरकारें समय-समय पर इस प्लेटफॉर्म पर सवाल उठाती रही हैं। भारत में भी टेलीग्राम कई बार कॉपीराइट उल्लंघन, फर्जीवाड़े और अवैध कंटेंट के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है।

रूस की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, ऑनलाइन सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर वैश्विक बहस को तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि टेलीग्राम प्रशासन रूस के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या भविष्य में दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है।

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