August 3, 2026

दिल्ली के सरकारी अस्पताल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, दुर्लभ हृदय रोगी की रोबोटिक वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से नई मिसाल

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नई दिल्ली । भारत ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने दुनिया की पहली रोबोटिक लेफ्ट सिस्टमिक एट्रियोवेंट्रिकुलर (एवी) वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक कर वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई है। इस उपलब्धि को आधुनिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रक्रिया एक ऐसे मरीज पर की गई जो जन्म से ही दो अत्यंत दुर्लभ और जटिल हृदय संबंधी विकृतियों से पीड़ित था।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह जटिल ऑपरेशन संस्थान की निदेशक डॉ. कविता शर्मा की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने प्रोफेसर डॉ. अनुभव गुप्ता के नेतृत्व में इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफल बनाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अत्याधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं की क्षमता का भी प्रमाण है।

जिस मरीज का ऑपरेशन किया गया, वह जन्मजात रूप से ‘कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज’ (ccTGA) और ‘डेक्स्ट्रोकार्डिया’ जैसी दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित था। ccTGA ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय की संरचना सामान्य से भिन्न होती है और शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए हृदय के हिस्सों को अतिरिक्त दबाव में कार्य करना पड़ता है। वहीं डेक्स्ट्रोकार्डिया में हृदय सामान्य स्थिति के विपरीत छाती के दाईं ओर स्थित होता है, जिससे किसी भी प्रकार की सर्जरी अत्यधिक जटिल हो जाती है।

इन दोनों स्थितियों के कारण पारंपरिक सर्जरी की तकनीक अपनाना संभव नहीं था। आमतौर पर रोबोटिक माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट छाती के दाईं ओर से किया जाता है, लेकिन इस मरीज में हृदय की स्थिति अलग होने के कारण चिकित्सकों ने पूरी प्रक्रिया के लिए बाईं ओर से प्रवेश का नया तरीका विकसित किया। यह तकनीक पहले कभी इस प्रकार उपयोग में नहीं लाई गई थी और इसी कारण इसे विश्व की पहली रोबोटिक लेफ्ट सिस्टमिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी माना जा रहा है।

विशेषज्ञ टीम ने ऑपरेशन के दौरान छाती की हड्डी को काटने के बजाय छोटे-छोटे पोर्ट के माध्यम से रोबोटिक उपकरणों का उपयोग किया। इस मिनिमली इनवेसिव तकनीक के कारण मरीज के शरीर को कम नुकसान पहुंचा और ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ पूरा किया गया। चिकित्सकों के अनुसार इस पद्धति से रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा काफी कम रहता है, ऑपरेशन के बाद दर्द भी अपेक्षाकृत कम होता है तथा मरीज सामान्य जीवन में जल्दी लौट सकता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भविष्य में जटिल जन्मजात हृदय रोगों के उपचार के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। रोबोटिक तकनीक की मदद से कठिन सर्जरी को अधिक सुरक्षित, सटीक और कम जोखिम वाला बनाया जा सकता है। इससे ऐसे मरीजों को भी लाभ मिलेगा जिनके लिए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

यह उपलब्धि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की बढ़ती क्षमता को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का विश्वास है कि इस सफलता के बाद देश में रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में नए अनुसंधान और उन्नत उपचार पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत वैश्विक चिकित्सा समुदाय में नवाचार आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के एक मजबूत केंद्र के रूप में अपनी पहचान और अधिक सुदृढ़ करेगा।

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