September 13, 2026

V2V टेक्नोलॉजी से बदल जाएगी ड्राइविंग, अब एक-दूसरे से 'बात' करेंगी गाड़ियां, सरकार लाई बड़ा प्लान

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नई दिल्ली। भारत में सड़क सुरक्षा को नई तकनीक के जरिए मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर नए वाहनों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इस तकनीक के जरिए वाहन आपस में वायरलेस माध्यम से जानकारी साझा करेंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका पहले ही पता चल सकेगी।

क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?
V2V यानी व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन ऐसी तकनीक है, जिसमें वाहन एक-दूसरे से अपनी स्पीड, लोकेशन, दिशा और एक्सीलेरेशन जैसी जानकारी रियल टाइम में साझा करते हैं। इससे आसपास चल रहे अन्य वाहनों को संभावित खतरे की पहले ही चेतावनी मिल जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाए, गलत लेन में आ जाए या सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाए, तो V2V सिस्टम पीछे आने वाले वाहन को तुरंत अलर्ट भेज देगा।

ADAS का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक तकनीक
यह तकनीक मौजूदा ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उसे और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाई जा रही है। जहां ADAS कैमरा, रडार और सेंसर पर निर्भर करता है, वहीं V2V वाहन-से-वाहन सीधे संवाद स्थापित करता है। इसके लिए दूरसंचार विभाग ने 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड निर्धारित किया है, जिससे वाहन सुरक्षित तरीके से रियल टाइम डेटा साझा कर सकेंगे।

कब से लागू होगा नियम?
ड्राफ्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले L, M और N श्रेणी के सभी नए वाहनों में V2V सिस्टम अनिवार्य किया जा सकता है।

L श्रेणी: दोपहिया और तिपहिया वाहन
M श्रेणी: कार, बस और अन्य यात्री वाहन
N श्रेणी: ट्रक और हल्के वाणिज्यिक वाहन

वहीं जिन मॉडलों में पहले से यह तकनीक मौजूद है, उन्हें 1 अक्टूबर 2027 से निर्धारित मानकों के अनुरूप करना होगा। चरणबद्ध लागू करने का उद्देश्य वाहन निर्माताओं और कंपोनेंट कंपनियों को नई तकनीक विकसित करने और अपनाने के लिए पर्याप्त समय देना है।

दुनिया में कहां हो रहा इस्तेमाल?
चीन, जापान, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में V2V और V2X (Vehicle-to-Everything) तकनीक पर काम चल रहा है। फिलहाल अधिकांश देशों में यह पायलट प्रोजेक्ट या सीमित स्तर पर लागू है। कनेक्टेड व्हीकल तकनीक के मामले में चीन सबसे आगे माना जाता है, जबकि जापान V2X नेटवर्क पर विशेष जोर दे रहा है।

प्राइवेसी को लेकर भी चिंता
सरकार का कहना है कि इस सिस्टम में ड्राइवर की व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, मोबाइल नंबर या अन्य निजी विवरण साझा नहीं होंगे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा के पैटर्न और वाहन संबंधी डेटा के उपयोग को लेकर गोपनीयता और थर्ड पार्टी एक्सेस जैसी चिंताएं बनी रह सकती हैं।

बढ़ सकती है वाहनों की कीमत
नई तकनीक के शामिल होने से वाहनों में अतिरिक्त हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर लगाने होंगे, जिससे भविष्य में नई कारों और अन्य वाहनों की कीमतों में कुछ बढ़ोतरी संभव है। हालांकि सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं में कमी के लिहाज से इसे एक महत्वपूर्ण तकनीकी कदम माना जा रहा है।

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