September 13, 2026

राम मंदिर ट्रस्ट से पुलिस कार्रवाई तक कई मुद्दों पर सरकार घिरी, संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

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नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के बीच विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में उपस्थित होकर जवाब देने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जिन विषयों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उन पर संसद में खुली और विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए ताकि सभी पक्षों के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका आरोप था कि सरकार चर्चा से बच रही है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद ही वह सर्वोच्च मंच है जहां सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि उठाए गए मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके।

विपक्ष की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ मामलों को भी उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था या भगवान राम के प्रति नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए मिले दान और उससे जुड़े विभिन्न मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग है। उनका कहना था कि यदि किसी भी प्रकार के सवाल उठते हैं तो उनका उत्तर सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।

संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का स्पष्ट उत्तर दे। उन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने तथा निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष का विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में है। उन्होंने कहा कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके। विपक्षी दलों का कहना है कि संसद में चर्चा के माध्यम से ही लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर जवाब दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी इन विषयों को लेकर संसद में बहस और विरोध का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में दोनों पक्षों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

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