September 13, 2026

ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

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नई दिल्ली । खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को लेकर देश में नियामकीय सख्ती के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कई लोकप्रिय शराब उत्पादों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने नियमों के कथित उल्लंघन, भ्रामक दावों और बिना अनुमति वाले फ्लेवर के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में कई प्रसिद्ध शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई के बाद शराब उद्योग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित कंपनियों से जवाब भी मांगा जा रहा है।

एफएसएसएआई के अनुसार जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ उत्पादों में ऐसे बाहरी फ्लेवर का उपयोग किया गया, जिनकी अनुमति निर्धारित मानकों के तहत नहीं थी। नियामक का कहना है कि रम और व्हिस्की जैसे उत्पादों में स्वाद और खुशबू का विकास उत्पादन की प्राकृतिक प्रक्रिया, जैसे फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरेशन के माध्यम से होना चाहिए। यदि किसी उत्पाद में कृत्रिम या बाहरी फ्लेवर मिलाए जाते हैं, तो उसे उसी श्रेणी के अनुरूप स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना आवश्यक है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ उत्पाद मुख्य रूप से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल या न्यूट्रल स्पिरिट से तैयार किए गए थे और बाद में उनमें स्वाद तथा खुशबू के लिए अतिरिक्त फ्लेवर मिलाए गए। नियामक का मानना है कि ऐसे उत्पादों को सामान्य रम या व्हिस्की के रूप में प्रस्तुत करना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। इसलिए ऐसे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने के लिए उचित लेबलिंग अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

कार्रवाई के दौरान जिन उत्पादों पर रोक लगाई गई है उनमें ओल्ड मॉन्क के कुछ वेरिएंट, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की, रॉयल चैलेंज व्हिस्की, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम, सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर XXX रम सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। नियामक का कहना है कि इन उत्पादों की बिक्री तब तक प्रतिबंधित रहेगी, जब तक संबंधित नियमों और मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता।

एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि कुछ उत्पादों पर किए गए आयु और गुणवत्ता संबंधी दावे उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाते थे। ऐसे दावों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक माना गया है। नियामक ने स्पष्ट किया कि खाद्य और पेय पदार्थों की पैकेजिंग पर दी जाने वाली प्रत्येक जानकारी सत्य, प्रमाणित और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद में फ्लेवर आधारित विशेषताएं हैं तो उन्हें उसी रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, न कि मानक श्रेणी के उत्पाद के रूप में।

इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण, पारदर्शी लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन पर अधिक जोर दिया जाएगा। आने वाले समय में संबंधित कंपनियां नियामकीय निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सुधार कर सकती हैं, जबकि उपभोक्ताओं को भी उत्पाद खरीदते समय लेबल और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

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