September 13, 2026

IIT दिल्ली के कार्यक्रम पर सियासी विवाद तेज, ओवैसी ने संविधान की धाराओं से जताई आपत्ति

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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने के बाद अब कार्यक्रम से जुड़े कथित निर्देशों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में छात्रों को प्रधानमंत्री से मेडल या डिग्री लेते समय सिर झुकाने और वैदिक मंत्रोच्चार के दौरान खड़े रहने के निर्देश दिए गए थे। ओवैसी ने इन कथित निर्देशों पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान की भावना और वैज्ञानिक सोच से जुड़े प्रावधानों के विपरीत बताया है। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ओवैसी ने कहा कि IIT दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित सरकारी तकनीकी संस्थान में छात्रों के लिए इस तरह के कथित निर्देश गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनका कहना है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार छात्रों को यह तक बताया गया था कि प्रधानमंत्री से मेडल लेते समय उन्हें किस तरह और कितनी मात्रा में गर्दन झुकानी है। इसके साथ ही वैदिक मंत्रों के पाठ के दौरान सभी छात्रों के खड़े रहने की बात भी सामने आई। ओवैसी ने कहा कि अगर इस तरह के निर्देश वास्तव में दिए गए हैं तो इन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

अपने बयान में ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लेख किया। उनका तर्क है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों को संविधान की कसौटी पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि IIT जैसे संस्थान केवल तकनीकी शिक्षा के केंद्र नहीं हैं बल्कि वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51A के वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने से जुड़े प्रावधान का भी हवाला दिया।

ओवैसी ने प्रधानमंत्री के सामने छात्रों के कथित तरीके से अभिवादन करने के निर्देश पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी सरकारी शिक्षण संस्थान में छात्रों को इस तरह के निर्देश देना उचित नहीं है। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित का मतलब केवल सरकार का समर्थन करना नहीं है बल्कि जब किसी सरकारी फैसले या कदम को गलत माना जाए तो उसके खिलाफ आवाज उठाना भी राष्ट्रीय हित का हिस्सा हो सकता है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में करीब 587 पीएचडी स्कॉलर्स और 3,000 से ज्यादा छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान छात्रों को उनके भविष्य और देश में नवाचार की भूमिका को लेकर संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से जिज्ञासा बनाए रखने और बड़ी चुनौतियों को छोटे हिस्सों में बांटकर उनका समाधान खोजने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने के साथ अपने शिक्षकों और संस्थान से जुड़े रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं की प्रतिभा और नवाचार से जुड़ा है। ऐसे में IIT दिल्ली का यह कार्यक्रम शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

फिलहाल ओवैसी की आपत्ति मुख्य रूप से कथित प्रोटोकॉल और धार्मिक मंत्रोच्चार के दौरान दिए गए निर्देशों को लेकर है। इन निर्देशों की वास्तविक प्रकृति और उनका आधिकारिक आधार क्या था इस पर संस्थान या सरकार की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। इसलिए इस पूरे मामले में अंतिम स्थिति आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच IIT दिल्ली का दीक्षांत समारोह एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में परंपरा प्रोटोकॉल संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को लेकर बहस के केंद्र में आ गया है।

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