September 13, 2026

ट्रेन स्वच्छता पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट उजागर, टॉयलेट की बदबू और रखरखाव में कमियां आईं सामने।

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ई दिल्ली । भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था, डिब्बों के रखरखाव और बायो-टॉयलेट प्रबंधन पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक अर्थात कैग की नवीनतम रिपोर्ट में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। संसद में प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन यात्रा के दौरान मिलने वाली ऑन-बोर्ड स्वच्छता सेवाओं से लगभग पचास प्रतिशत यात्री असंतुष्ट हैं। लंबी दूरी का सफर तय करने वाले यात्रियों को टॉयलेट में जलभराव, बदबू और सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि रेलवे द्वारा प्रतिवर्ष स्वच्छता और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन किया जाता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन में कई खामियां देखी गई हैं। ऑडिट टीम को रेलवे प्रशासन द्वारा ऐसा कोई स्पष्ट और पारदर्शी लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया जा सका, जिससे यह सटीक जानकारी मिल सके कि आवंटित बजट का कितना हिस्सा वास्तव में सफाई कार्यों पर व्यय किया गया।

वित्तीय प्रक्रियाओं और ठेकेदारों के नियमन को लेकर भी रिपोर्ट में लापरवाही की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों पर लगाए गए जुर्माने या राशि कटौती का कोई केंद्रीय डेटाबेस या पारदर्शी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। हालांकि रेलवे प्रशासन ने ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई का दावा किया, किंतु ऑडिट प्रक्रिया के दौरान इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य या वित्तीय विवरण जमा नहीं कराए जा सके।

सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि चालीस प्रतिशत से अधिक रेल यात्रियों ने ट्रेनों के टॉयलेट में बदबू और पानी के भराव की समस्या पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, पचास प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं के सुचारू रूप से कार्य न करने की शिकायत की है। ट्रेन डिब्बों की अत्याधुनिक और स्वचालित धुलाई के लिए स्वीकृत परियोजनाओं की गति भी अत्यंत धीमी पाई गई है।

कैग की इस रिपोर्ट में झांसी और ग्वालियर जैसे प्रमुख रेल मंडलों का भी संदर्भ देखने को मिलता है, जहां ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट स्थापित करने के लिए बजट स्वीकृत होने के पश्चात भी परियोजनाएं लंबित पाई गईं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रेल यात्रियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए यह रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैग ने रेल मंत्रालय को वित्तीय पारदर्शिता और जमीनी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं।

विमानन और रेल सेवाओं के तुलनात्मक अध्ययन में यात्रियों की मूल सुविधाओं का ध्यान रखना सर्वोपरि माना गया है। कैग की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रेलवे प्रशासन ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने, ऑन-बोर्ड सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बायो-टॉयलेट के नियमित रख-रखाव के लिए नई कार्ययोजना लागू करेगा ताकि यात्रा के अनुभव में सुधार किया जा सके।

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