September 13, 2026

सीवान फायरिंग विवाद के बीच तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को राजभवन मार्च,बिहार पुलिस ने घातक हथियारों पर लगाई रोक

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नई दिल्ली । बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से AK-47 से फायरिंग के मामले ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त को पटना में राजभवन मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय ने भीड़ नियंत्रण और सामान्य विधि-व्यवस्था की ड्यूटी में AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है।

सीवान में बिहार बंद और छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच एक जवान के AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो सामने आया था। इस घटना में तीन छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए और प्रदर्शनकारियों के बीच इस तरह के घातक हथियार के इस्तेमाल पर जवाब मांगा।

मामले के सामने आने के बाद संबंधित पुलिस जवान को निलंबित किया गया। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल एक जवान के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और फायरिंग के आदेश तथा पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। घटना को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं, इसलिए पूरे घटनाक्रम की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तेजस्वी यादव ने सीवान की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग का आदेश किस स्तर से दिया गया। उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने 19 अगस्त को पटना में पार्टी कार्यालय से राजभवन या लोक भवन तक मार्च निकालने का निर्णय लिया है।

प्रस्तावित मार्च में पार्टी के विधायक, विधान परिषद सदस्य और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होने वाले इस मार्च के जरिए विपक्ष सीवान फायरिंग मामले में जवाबदेही तय करने और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग उठाएगा।

इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय के नए निर्देश को महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। निर्देश के अनुसार सामान्य कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की ड्यूटी के दौरान AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य भीड़ नियंत्रण के दौरान बल प्रयोग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन हथियारों का इस्तेमाल पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है। उग्रवाद, आतंकवाद या बड़े अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियानों जैसी परिस्थितियों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सामान्य प्रदर्शन, भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में इन हथियारों के प्रयोग की अनुमति नहीं होगी।

विशेष परिस्थिति में ऐसे हथियारों को साथ रखना जरूरी होने पर भी भीड़ नियंत्रण के दौरान इनके इस्तेमाल पर रोक लागू रहेगी। जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों और जवानों को नए निर्देशों की जानकारी देने तथा उनके पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

सीवान की घटना के बाद अब बिहार में पुलिस की भीड़ नियंत्रण नीति और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन ने असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

अब 19 अगस्त को प्रस्तावित तेजस्वी यादव के राजभवन मार्च पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। सीवान की घटना के बाद लिया गया हथियार संबंधी निर्णय आने वाले समय में बिहार में कानून-व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों से निपटने की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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