September 13, 2026

कृषि से लेकर रक्षा क्षेत्र तक भारत में ड्रोन का बदलता स्वरूप, जानिए कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं रोजगार के नए अवसर

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नई दिल्ली । 
भारत में तकनीक के तेजी से बदलते परिदृश्य के बीच ड्रोन अब केवल शादी-ब्याह या वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज यह आधुनिक तकनीक देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, आपदा प्रबंधन, इंफ्रास्ट्रक्चर निगरानी और सीमा सुरक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। खेतों में फसलों पर पोषक तत्वों के छिड़काव से लेकर दुर्गम इलाकों में रक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने तक, ड्रोन ने कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है। देश में बढ़ती मांग के साथ ही ड्रोन निर्माण, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और रिमोट संचालन से जुड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

उद्योग जगत के आंकड़ों के अनुसार, भारत का ड्रोन बाजार आने वाले वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज करने की दिशा में अग्रसर है। वर्तमान में ड्रोन तकनीक का बाजार कई हजार करोड़ रुपये का हो चुका है, जिसके वर्ष 2030 तक 21 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक औसत वृद्धि दर के साथ लगभग 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो जाने का अनुमान जताया जा रहा है। इस तेज बढ़ोतरी के पीछे केवल हार्डवेयर की बिक्री ही नहीं, बल्कि ड्रोन ट्रेनिंग, रिपेयरिंग, डेटा एनालिसिस और सॉफ्टवेयर सेवाओं का विस्तार भी प्रमुख कारण है।

कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में ड्रोन तकनीक एक क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आई है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण भारत में ड्रोन का उपयोग व्यापक रूप से बढ़ाया जा रहा है। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक कृषि ड्रोन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे वे किसानों को उर्वरक और कीटनाशकों के समयबद्ध छिड़काव की सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे जहां एक ओर खेती में लगने वाले समय और लागत की बचत हो रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन और आय के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।

ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने और संपत्ति विवादों को समाप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई स्वामित्व योजना में भी ड्रोन सर्वे ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। देश के लाखों गांवों में ड्रोन द्वारा सटीक भू-स्थानिक मैपिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है, जिसके आधार पर करोड़ों ग्रामीणों को उनकी जमीन के आधिकारिक संपत्ति कार्ड दिए जा चुके हैं। इससे ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के आधार पर संस्थागत वित्तीय सहायता प्राप्त करने में भी आसानी हो रही है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय परियोजनाओं की डिजिटल निगरानी में भी ड्रोन तकनीक की भूमिका केंद्रीय हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा निर्माणाधीन हाईवे परियोजनाओं की मासिक प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित ड्रोन रिकॉर्डिंग का उपयोग किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, भारतीय रेलवे द्वारा ट्रैक, पुलों, यार्डों और दुर्गम रेल खंडों की सुरक्षा व रखरखाव के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है। आपदा प्रबंधन के दौरान भी यह तकनीक तुरंत वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा राहत टीमों को सटीक जानकारी भेजने में वरदान साबित हो रही है।

मध्य प्रदेश जैसे विशाल भौगोलिक विस्तार वाले राज्यों में भी खेती, वन संरक्षण और भूमि सर्वे में ड्रोन के इस्तेमाल को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। रक्षा के मोर्चे पर भी भारतीय सेनाएं और सुरक्षा बल निगरानी, खुफिया जानकारी एकत्र करने तथा सटीक लक्ष्यों की पहचान के लिए स्वदेशी ड्रोन प्रणालियों पर अपनी निर्भरता लगातार बढ़ा रहे हैं। सैन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नागरिक और रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाले साझिया कंपोनेंट्स के कारण घरेलू निर्माण उद्योग को जबरदस्त संबल मिल रहा है।

ड्रोन नियम 2021 के लागू होने के बाद से नियामक प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों में भारी सरलीकरण किया गया है। 90 प्रतिशत से अधिक अनुपालन आवश्यकताओं को समाप्त कर भरोसे पर आधारित व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है, जिससे स्वदेशी स्तर पर ड्रोन पुर्जों के निर्माण को बड़ी गति मिली है। आज देश में हजारों पंजीकृत ड्रोन और प्रशिक्षित रिमोट पायलट मौजूद हैं, जबकि सैकड़ों डीजीसीए स्वीकृत संस्थान प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। आने वाले समय में यह सेक्टर लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की अपार क्षमता रखता है।

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