March 15, 2026

बच्चों पर सोशल मीडिया बैन नहीं करेगी सरकार, उम्र के हिसाब से लग सकती हैं सख्त शर्तें

0
socail-media-1772951417
नई दिल्ली। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की योजना नहीं है। हालांकि, सरकार 18 साल से कम उम्र के किशोरों के लिए सख्त और उम्र-आधारित नियम लागू करने की तैयारी कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इस मुद्दे पर एक नया कानून लाने पर विचार कर रही है, जिसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में बच्चों के लिए अलग-अलग आयु वर्ग के आधार पर नियम तय किए जाएंगे।

उम्र के हिसाब से नियम

प्रस्तावित ढांचे में बच्चों को तीन श्रेणियों में बांटने की संभावना है—

8 से 12 वर्ष: सबसे कड़े और प्रतिबंधात्मक नियम

12 से 16 वर्ष: सीमित उपयोग और निगरानी

16 से 18 वर्ष: अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता, लेकिन सुरक्षा मानकों के साथ

सरकार का मानना है कि आज की पीढ़ी तकनीक के प्रति पहले से अधिक जागरूक है, इसलिए पूर्ण प्रतिबंध के बजाय संतुलित नियम बनाना अधिक प्रभावी होगा।

समय सीमा लागू करने पर विचार

सूत्रों के अनुसार, सरकार ‘टाइम-बेस्ड लिमिट’ यानी समय-आधारित उपयोग की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है। इसके तहत बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग के लिए कुछ संभावित प्रावधान हो सकते हैं—

दिन में सीमित समय, जैसे एक घंटे तक ही इस्तेमाल

देर शाम या रात में लॉग-इन पर रोक

सोशल मीडिया अकाउंट के लिए माता-पिता की अनिवार्य सहमति

यह मॉडल कुछ हद तक उन नियमों से प्रेरित माना जा रहा है, जो China और Australia में ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के लिए लागू किए गए हैं।

राज्यों के अलग-अलग प्रस्ताव

हाल के महीनों में कुछ राज्यों ने भी इस दिशा में कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है। Andhra Pradesh ने 13 वर्ष से कम और Karnataka ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का सुझाव दिया है।

हालांकि सोशल मीडिया कंपनियों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग नियम होने से उन्हें लागू करना तकनीकी रूप से मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से केंद्र सरकार पूरे देश के लिए एक समान कानून लाने पर विचार कर रही है।

डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य चिंता

सरकार के इस कदम के पीछे बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएं प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। Internet Freedom Foundation जैसे संगठनों ने हालांकि चेतावनी दी है कि अत्यधिक प्रतिबंध से डिजिटल जेंडर गैप बढ़ सकता है। उनका कहना है कि कई बार सुरक्षा के नाम पर लगाए गए नियम लड़कियों की इंटरनेट तक पहुंच को सीमित कर सकते हैं।

कुल मिलाकर सरकार का प्रयास ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करने का है, जिसमें बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी सुनिश्चित हो और डिजिटल दुनिया तक उनकी पहुंच भी पूरी तरह खत्म न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *