September 13, 2026

एक कॉल और बैंक अकाउंट खाली! Screen Sharing Scam से ऐसे होता है UPI फ्रॉड, जरा सी गलती पड़ सकती है भारी

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नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन फ्रॉड के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। अब जालसाज सिर्फ OTP या फर्जी लिंक के जरिए ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे बल्कि Screen Sharing Scam के जरिए मोबाइल फोन की स्क्रीन तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह ठगी इतनी चालाकी से की जाती है कि कई बार पढ़े लिखे और तकनीक की अच्छी जानकारी रखने वाले लोग भी इसके जाल में फंस जाते हैं। पूरा खेल एक फोन कॉल से शुरू होता है और देखते ही देखते पीड़ित की मेहनत की कमाई खतरे में पड़ सकती है। ऐसे मामलों में जालसाज खुद को बैंक कस्टमर केयर बीमा कंपनी या किसी शॉपिंग प्लेटफॉर्म का कर्मचारी बताकर फोन करते हैं। कई बार फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए भी लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता है। कॉल करने वाला बेहद भरोसे के साथ बैंकिंग से जुड़ी भाषा का इस्तेमाल करता है ताकि सामने वाले को किसी तरह का शक न हो।

जालसाज अक्सर रिफंड कैशबैक KYC अपडेट या किसी फर्जी सब्सक्रिप्शन चार्ज को वापस कराने का झांसा देते हैं। वह पीड़ित को यह भरोसा दिलाते हैं कि अगर बताए गए कुछ आसान स्टेप पूरे कर दिए जाएं तो उसका पैसा वापस आ जाएगा या बैंकिंग से जुड़ी समस्या तुरंत दूर हो जाएगी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर स्कैमर अगला कदम उठाता है। वह व्यक्ति से AnyDesk TeamViewer या Quick Support जैसी स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कह सकता है। इन ऐप्स का इस्तेमाल सामान्य तौर पर रिमोट सपोर्ट या तकनीकी सहायता के लिए किया जाता है लेकिन जालसाज इनका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऐप डाउनलोड कराने के बाद स्कैमर किसी कोड या अन्य जानकारी के जरिए मोबाइल स्क्रीन देखने की कोशिश करता है। अगर यूजर बिना पूरी जानकारी के स्क्रीन शेयर करने की अनुमति दे देता है तो उसके फोन पर होने वाली गतिविधियां जालसाज की नजर में आ सकती हैं। इसके बाद ठगी का सबसे खतरनाक चरण शुरू होता है। स्कैमर पीड़ित से कह सकता है कि रिफंड प्राप्त करने के लिए UPI रिक्वेस्ट अप्रूव करनी होगी या किसी ऐप में प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कई बार सामने वाला यह समझता रहता है कि वह पैसे प्राप्त करने की प्रक्रिया कर रहा है जबकि वास्तव में उससे पैसे भेजने की कोशिश कराई जा रही होती है।

स्क्रीन शेयरिंग के दौरान संवेदनशील जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। खासकर यदि कोई व्यक्ति UPI से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान अपना PIN डालता है तो स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधि को कोई दूसरा व्यक्ति देख सकता है। इसी तरह OTP या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी साझा करना भी भारी नुकसान का कारण बन सकता है। एक बार जरूरी जानकारी जालसाज के हाथ लगने के बाद वह लगातार ट्रांजैक्शन करने की कोशिश कर सकता है। पीड़ित को अक्सर तब तक पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा नहीं होता जब तक बैंक खाते से पैसे कटने के संदेश नहीं आने लगते।

इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करना या मोबाइल की स्क्रीन किसी के साथ शेयर करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। बैंक या किसी विश्वसनीय संस्था के नाम पर आए कॉल को भी बिना सत्यापन के सही नहीं मानना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के साथ UPI PIN OTP या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। रिफंड पाने के नाम पर आने वाली किसी भी UPI रिक्वेस्ट को ध्यान से जांचना जरूरी है। डिजिटल सुविधा के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते में जमा पूरी रकम को खतरे में डाल सकती है।

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