September 13, 2026

चेन्नई मेट्रो के विज्ञापन पर मचा बवाल, ‘गर्लफ्रेंड देगी 0% इंटरेस्ट’ वाले दावे पर महिला सम्मान को लेकर उठे सवाल

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नई दिल्ली । चेन्नई मेट्रो में लगे एक विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए इस विज्ञापन में गर्लफ्रेंड की तुलना ब्याज से की गई है। विज्ञापन में दावा किया गया कि गर्लफ्रेंड शायद शून्य प्रतिशत इंटरेस्ट दे, जबकि एफडी पर 14 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है। विज्ञापन का यह अंदाज अब सवालों के घेरे में आ गया है।

चेन्नई मेट्रो के डिब्बों और परिसरों में लगाए गए इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर भी नाराजगी देखने को मिली। विज्ञापन में वित्तीय निवेश को आकर्षक तरीके से पेश करने के लिए निजी रिश्ते का उदाहरण इस्तेमाल किया गया था। लेकिन यही तुलना विवाद की वजह बन गई।

विज्ञापन को लेकर आपत्ति जताने वालों का कहना है कि किसी वित्तीय उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं और निजी रिश्तों को इस तरह इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि इस तरह की भाषा महिलाओं को एक वस्तु की तरह पेश करती है और सार्वजनिक स्थान पर ऐसे संदेश से महिलाओं की गरिमा प्रभावित हो सकती है।

मामला राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। डीएमके की सांसद तमिझाची थंगापांडियन ने विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने मांग की कि इस विज्ञापन को मेट्रो से तत्काल हटाया जाए। उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना महिलाओं की प्रतिष्ठा के लिए उचित नहीं है।

एआईएडीएमके की ओर से भी विज्ञापन पर विरोध जताया गया है। पार्टी की प्रवक्ता कोवाई सत्यन ने इसे लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की और संबंधित क्रेडिट सोसायटी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही। उनका कहना है कि लोगों को ब्याज दर के बारे में जानकारी देने के लिए महिलाओं का अपमान करने वाली भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विवाद बढ़ने के बाद अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में विज्ञापन प्रदर्शित करने से पहले उनकी भाषा और विषयवस्तु की किस तरह जांच की जानी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग आते-जाते हैं, इसलिए विज्ञापनों की भाषा को लेकर संवेदनशीलता बरतना जरूरी माना जाता है।

इस पूरे मामले में विज्ञापन की रचनात्मक शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एफडी की ब्याज दर को आकर्षक बनाने के लिए रिश्ते और भावनाओं से जुड़ी तुलना करने की कोशिश की गई, लेकिन इसका संदेश लोगों के एक वर्ग को आपत्तिजनक लगा। इसी वजह से विज्ञापन का उद्देश्य पीछे छूट गया और उसकी भाषा चर्चा का मुख्य विषय बन गई।

चेन्नई मेट्रो में लगाए गए इस विज्ञापन को लेकर अब कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। विरोध करने वालों का कहना है कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़े विषयों को ध्यान में रखते हुए ऐसे विज्ञापनों की समीक्षा होनी चाहिए। वहीं पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या वित्तीय प्रचार के लिए निजी रिश्तों और महिलाओं को इस तरह तुलना का आधार बनाना उचित है।

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