September 13, 2026

हरतालिका तीज की तैयारी शुरू जानिए कब रखना है व्रत कैसे करें पूजा और किस विधि से मिलेगा शिव पार्वती का आशीर्वाद

0
untitled-1789209448

नई दिल्ली। हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में शामिल है और सुहागिन महिलाओं के बीच इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन पति की लंबी आयु तथा परिवार की सुख समृद्धि की कामना करती हैं। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए यह व्रत रखने की परंपरा निभाती हैं। हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। 2026 में हरतालिका तीज को लेकर पंचांगों में स्थानीय समय के आधार पर तारीख में अंतर दिखाई दे रहा है। दिल्ली के अनुसार यह पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

हरतालिका तीज के दिन महिलाएं प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी स्थिति के अनुसार व्रत रखने का निर्णय लेना उचित है। पूजा के लिए घर में साफ स्थान पर चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पारंपरिक रूप से मिट्टी या बालू से शिव पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की भी मान्यता है।

पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जा सकती है। इसके बाद शिवलिंग और माता पार्वती को जल अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा फूल और जल चढ़ाने की परंपरा है जबकि माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। महिलाएं माता को सिंदूर चूड़ी बिंदी मेहंदी चुनरी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित कर सकती हैं। इसके बाद दीपक और धूप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है।

हरतालिका तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने या पढ़ने का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि माता पार्वती की सहेली उन्हें अपने साथ वन में ले गई थी ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न हो। इसी प्रसंग से हरतालिका नाम जुड़ा माना जाता है। बाद में माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।

पूजा के दौरान महिलाएं शिव पार्वती के मंत्रों का जाप कर सकती हैं और आरती करने के बाद परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करती हैं। पूजा के अंत में हरतालिका तीज की कथा का श्रवण किया जाता है। जिन स्थानों पर सुबह पूजा संभव नहीं हो वहां प्रदोषकाल में शिव पार्वती की पूजा करने की भी मान्यता बताई गई है। दिल्ली के पंचांग में 2026 के लिए प्रातःकालीन पूजा का समय 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक बताया गया है। स्थानीय शहर के अनुसार यह समय बदल सकता है।

हरतालिका तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं बल्कि शिव और पार्वती के अटूट संबंध तथा समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं नए कपड़े पहनती हैं और परिवार के साथ मिलकर पर्व मनाती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की कथा सुनती हैं और भजन कीर्तन करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विधि विधान से शिव पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख शांति और प्रेम बना रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed