September 13, 2026

BRICS: नई दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान को राजी करने के लिए करनी पड़ी मशक्कत

0
0000000-1789282051

नई दिल्ली।
ब्रिक्स देशों (BRICS Nations) ने एकतरफा टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को सर्वसम्मति से जारी ‘नई दिल्ली घोषणापत्र-2026’ (New Delhi Declaration-2026’) में इन्हें वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं के लिए नुकसानदेह बताते हुए ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया। वहीं नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर ईरान (Iran) को तैयार करना आसान नहीं था। इसके लिए शनिवार सुबह 4 बजे तक मान-मनौव्वल और मशक्कत चलती रही।

ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) (World Trade Organization (WTO)) की विवाद निपटारा व्यवस्था बहाल करने और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में विकासशील देशों की आवाज और हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की।


आतंकवाद किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं

45 पन्नों और 140 बिंदुओं के नई दिल्ली घोषणापत्र का ईरान और यूएई ने भी समर्थन किया। इसमें ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। कहा गया कि किसी भी वजह या मकसद से अंजाम दी गई आतंकवादी घटनाओं को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। ब्रिक्स ने आतंकवाद, इसकी आर्थिक मदद, सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना दिए जाने के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र में कहा गया है कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स काउंटर -टेररिज्म वर्किंग ग्रुप और उसके पांच उप-समूहों के काम की सराहना करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।


पहलगाम हमले की निंदा

साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।


स्थायी सदस्यता का समर्थन

ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी दोहराया। घोषणापत्र में चीन और रूस ने भारत की बड़ी भूमिका के समर्थन की बात कही। यूएनएससी में सुधार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि इसे अब और नहीं टाला जा सकता है।


इजरायल को झटका

यूएई फलस्तीन समस्या के द्वि राष्ट्र समाधान का समर्थक है। ईरान भी इस प्रस्ताव के पक्ष में रहा। हालांकि, ब्रिक्स का यह प्रस्ताव इजरायल के लिए कूटनीतिक झटका है।


परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र घोषित हो मध्य एशिया

नई दिल्ली घोषणा में समूचे मध्य एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करने का भी प्रस्ताव है। यदि संयुक्त राष्ट्र किसी क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करता है तो वहां परमाणु हथियारों का निर्माण और वितरण निषेध होता है। ईरान पर अमेरिकी हमलों के मद्देनजर यह एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है।


कैसे राजी हुआ ईरान

ब्रिक्स में संयुक्त बयान पर यूएई और ईरान आखिर कैसे राजी हुए, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा गया लेकिन सूत्रों का दावा है कि ईरान संयुक्त बयान में फलस्तीन को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव जोड़ने की शर्त पर माना। इन शर्तों में फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र का पूर्ण सदस्य घोषित करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। यूएई ने भी इनका समर्थन किया। इसके बाद ईरान और यूएई की केमिस्ट्री में बदलाव दिखा।

सूत्रों के अनुसार, एकमत करने के लिए भारत ने सभी पक्षों से शनिवार सुबह चार बजे तक बात की। दिल्ली घोषणा पत्र के प्रस्ताव संख्या 31 में कहा गया है कि हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि इजरायल-फलस्तीन संघर्ष का सही और स्थायी समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है। ब्रिक्स सभी वैश्विक संगठनों में फलस्तीन के सही प्रतिनिधित्व की जरूरत को मानता है जिसमें विश्व बैंक, आईएमएफ जैसी वित्तीय संस्थाएं भी शामिल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *