भारत में सबसे ज्यादा बारिश कहां होती है, मेघालय का मावसिनराम क्यों है दुनिया का सबसे बरसाती इलाका
Mawsynram मेघालय के East Khasi Hills जिले में स्थित है। यहां सालाना औसतन लगभग 11872 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। इतनी अधिक वर्षा के कारण इस जगह का नाम Guinness World Records में भी दर्ज किया गया है। तुलना के लिए अगर भारत के बड़े शहरों को देखें तो वहां सालभर में औसतन केवल 700 से 1000 मिलीमीटर बारिश होती है। यानी मावसिनराम में होने वाली बारिश कई शहरों की तुलना में लगभग 10 से 15 गुना ज्यादा है।
इस इलाके में इतनी ज्यादा बारिश होने के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। मावसिनराम खासी पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों पर स्थित है और सीधे बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के रास्ते में पड़ता है। जब दक्षिण पश्चिम मानसून की नमी से भरी हवाएं इन पहाड़ियों से टकराती हैं तो वे ऊपर की ओर उठती हैं और भारी बारिश होती है। इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में Orographic Rainfall कहा जाता है।
मावसिनराम में खासकर जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान लगातार बारिश होती रहती है। कई बार तो यहां एक ही दिन में 1000 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश भी दर्ज की गई है। यही वजह है कि यह इलाका दुनिया के सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।
बारिश को मापने के लिए आमतौर पर मिलीमीटर यानी मिमी का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। एक मिलीमीटर बारिश का मतलब होता है कि यदि पानी जमीन से बहकर कहीं और न जाए और न ही वाष्पित हो, तो जमीन पर एक मिलीमीटर मोटी पानी की परत बन जाएगी। इस हिसाब से अगर मावसिनराम में सालभर में 11872 मिमी बारिश होती है तो इसका मतलब है कि वहां लगभग 11.8 मीटर तक पानी जमा हो सकता है।
बारिश को मापने के लिए रेन गेज नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है। भारत में मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र करने का काम India Meteorological Department यानी आईएमडी करता है। यही संस्था देशभर में बारिश और मौसम के आंकड़ों को रिकॉर्ड करती है।
मावसिनराम की अत्यधिक वर्षा इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाती है। यहां चारों तरफ हरियाली, झरने और बादलों से ढकी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इतनी ज्यादा बारिश के कारण यहां भूस्खलन और मिट्टी कटाव जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं।
इस तरह कहा जा सकता है कि मेघालय का मावसिनराम भारत का सबसे ज्यादा वर्षा वाला स्थान है और अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति और मानसूनी प्रभाव के कारण यह दुनिया भर में खास पहचान रखता है।
