भारत-ईयू एफटीए से बदल सकती है टेक्नोलॉजी की कीमत, जर्मनी ने व्यापार और सहयोग को लेकर बताई बड़ी संभावनाएं
नई दिल्ली ।भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए को लेकर जर्मनी की ओर से सकारात्मक संभावनाएं जताई गई हैं। भारत में जर्मन दूतावास में इकोनॉमिक कॉरपोरेशन और डेवलपमेंट के प्रमुख गॉटफ्राइड वॉन गेमिंगेन ने कहा कि इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ दोनों को मजबूती मिलेगी। उनके मुताबिक, एफटीए के बाद दोनों पक्षों के बीच कारोबार और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
गॉटफ्राइड वॉन गेमिंगेन ने कहा कि समझौते का एक महत्वपूर्ण असर यूरोप और जर्मनी की तकनीक के भारतीय बाजार तक पहुंच पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, एफटीए के बाद यूरोपियन और जर्मन टेक्नोलॉजी भारतीय ग्राहकों के लिए अधिक किफायती हो सकती है। इससे तकनीकी समाधान और उत्पादों के इस्तेमाल का दायरा बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर बनी मौजूदा अस्थिर परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में यूरोपीय संघ भारत के लिए एक अहम साझेदार बनकर उभरा है। दोनों पक्ष नियमों के आधार पर काम करने और आपसी भरोसे को महत्व देते हैं।
तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी उन्होंने कई संभावनाएं बताईं। गेमिंगेन के मुताबिक, आधुनिक तकनीक का उपयोग नदी के पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पानी से जुड़े प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जा सकता है।
भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक सहयोग के साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत-जर्मनी सबमरीन डील को लेकर जर्मनी के राजदूत जैस्पर विक ने कहा कि दस्तावेजों के स्तर पर प्रक्रिया को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि जर्मन पक्ष इस संबंध में अपनी सहमति दे चुका है। अब भारतीय पक्ष को अपनी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी करके आगे का निष्कर्ष निकालना है।
भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका की ओर से संभावित टैरिफ और प्रतिबंधों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई। जैस्पर विक ने कहा कि अमेरिका ने भारत पर अभी कोई टैरिफ या प्रतिबंध लागू नहीं किया है। उनके अनुसार, अमेरिकी कांग्रेस ने केवल राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया है। ऐसे में फिलहाल भारत पर इस तरह की कोई कार्रवाई लागू होने की बात नहीं है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को लेकर भी जैस्पर विक ने जर्मनी का रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त करने की जिम्मेदारी रूस की है और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किसी भी समय इसे रोक सकते हैं।
विक के अनुसार, यूक्रेन संघर्ष विराम समझौते के लिए तैयार है, लेकिन रूस ने अभी तक इस पर सहमति नहीं दी है। भारत-ईयू एफटीए, तकनीकी सहयोग, रक्षा संबंधों और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सामने आए इन बयानों से भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं।
