March 16, 2026

खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान

0
16-17-1773658061

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव किसी राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे संक्रांति कहा जाता है। विशेष रूप से जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास या मलमास लगता है। हिंदू धर्म में इस समय को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन पूजा पाठ, दान और जप तप के लिए इसे विशेष लाभकारी माना गया है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है और सूर्य के 13 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करने पर यह समाप्त होगा। इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाएगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं और 20 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।

त्रिग्रही योग का प्रभाव
मीन राशि में पहले से विराजमान शुक्र और शनि के साथ सूर्य के प्रवेश से त्रिग्रही योग बनता है। इसका सकारात्मक प्रभाव मिथुन, तुला, वृषभ, कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों पर आर्थिक लाभ, मान सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है।

मांगलिक कार्य वर्जित

खरमास के दौरान ग्रहों की शुभ दृष्टि का प्रभाव कम होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन और अन्य मांगलिक कार्य टालने की परंपरा है। साथ ही नए व्यापार की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

खरमास में क्या ना करें

भगवान, गुरु, माता पिता, गाय और स्त्री की निंदा न करें।

जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाना अशुभ माना गया है।

नए वाहन या घर खरीदने से परहेज करें।

विवाद और झगड़ों से दूर रहें।

खरमास में क्या करें

दान पुण्य, पूजा और धार्मिक कार्य करें। 

रामायण, गीता और सत्यनारायण कथा का पाठ लाभकारी है।सूर्य देव, भगवान शिव और विष्णु की पूजा से घर परिवार में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *