जनवरी के मुकाबले फरवरी में थोक महंगाई बढ़ी, मैन्युफैक्चरिंग और खाद्य कीमतों का असर
इससे पहले जनवरी में थोक महंगाई दर 1.81 प्रतिशत थी जबकि पिछले साल फरवरी में यह 2.45 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के बयान के अनुसार फरवरी 2026 में महंगाई दर सकारात्मक रहने की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, बेसिक मेटल, खाद्य उत्पाद, गैर-खाद्य उत्पाद और टेक्सटाइल की कीमतों में वृद्धि रही।
आंकड़ों के अनुसार फरवरी में खाद्य उत्पादों की थोक महंगाई दर 2.19 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 1.55 प्रतिशत थी। हालांकि सब्जियों की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिली है। सब्जियों में थोक महंगाई दर जनवरी के 6.78 प्रतिशत से घटकर फरवरी में 4.73 प्रतिशत पर आ गई। इसके बावजूद दाल, आलू, अंडे, मांस और मछली जैसी वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई का दबाव बढ़ा है। फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की थोक महंगाई दर जनवरी के 2.86 प्रतिशत से बढ़कर 2.92 प्रतिशत हो गई। वहीं गैर-खाद्य पदार्थों की श्रेणी में महंगाई दर जनवरी के 7.58 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 8.80 प्रतिशत हो गई। हालांकि ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में महंगाई दर अभी भी नकारात्मक बनी हुई है। फरवरी में फ्यूल और पावर बास्केट की थोक महंगाई दर -3.78 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह -4.01 प्रतिशत थी।
इससे पहले सरकार ने खुदरा महंगाई दर के भी आंकड़े जारी किए थे। फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.21 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जनवरी के 2.74 प्रतिशत से 0.47 प्रतिशत अधिक है।ग्रामीण इलाकों में फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही जबकि जनवरी में यह 2.73 प्रतिशत थी। वहीं शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.02 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 2.75 प्रतिशत थी।
खाद्य महंगाई की बात करें तो फरवरी में यह 3.47 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर 3.46 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
