October 8, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा के 25 साल पूरे होने पर अपने राजनीतिक सफर और सुशासन की सोच साझा की।

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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार 7 अक्टूबर को सरकार के प्रमुख के रूप में लोकसेवा के 25 साल पूरे होने के मौके पर जनता से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह इस मुकाम तक पहुंचेंगे। उन्होंने इस पूरे सफर के लिए देश के लोकतंत्र और संविधान के प्रति आभार व्यक्त किया।

दिल्ली में आयोजित ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 वर्षों तक सरकार का हिस्सा बने रहना उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जनता की सेवा से जुड़ी एक लंबी यात्रा है। उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों से लेकर सरकार के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारियां संभालने तक के सफर का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी बड़े पद को लक्ष्य बनाकर राजनीति में कदम नहीं रखा था।

प्रधानमंत्री ने अच्छे शासन की अपनी सोच पर बात करते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ को इसका आधार बताया। उन्होंने कहा कि समाज को राजनीति के लिए वोट-बैंक के आधार पर बांटने से कई समस्याएं पैदा हुईं। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी खेत तक पानी नहीं पहुंचता है तो उसका नुकसान केवल किसी एक जाति के किसान को नहीं होता। इसी तरह बिजली की कमी से पैदा होने वाला अंधेरा किसी एक समुदाय के घर तक सीमित नहीं रहता।

उन्होंने कहा कि जब किसी समस्या का असर समाज के सभी वर्गों पर पड़ता है तो उसके समाधान का लाभ भी सभी को मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने अच्छे शासन को ‘सैचुरेशन’ से जोड़ने की बात कही। उनके अनुसार सैचुरेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं और सुविधाओं के लिए पात्र प्रत्येक लाभार्थी तक उनका लाभ पहुंचे। कोई पात्र व्यक्ति छूटे नहीं और किसी हकदार को उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े, यही इस व्यवस्था का लक्ष्य है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीति में आने से पहले के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आदिवासी इलाकों में काम किया और पहाड़ों में भी समय बिताया। इन अनुभवों के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने खुद चुनाव लड़ने या किसी बड़े पद पर पहुंचने की योजना नहीं बनाई थी।

उन्होंने कहा कि जीवन को निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि किसी उद्देश्य के लिए जीना चाहिए। इसी विचार को उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की दिशा से जोड़ा। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद शुरू हुआ उनका सरकार से जुड़ा सफर अब 25 वर्ष पूरे कर चुका है। इस अवसर पर उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तथा जनता के प्रति जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।

‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख केंद्र सुशासन, समान रूप से विकास का लाभ पहुंचाने और सार्वजनिक जीवन में सेवा की भावना रहा। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के विभिन्न पड़ावों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस मुकाम तक पहुंचने की कल्पना नहीं की थी। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ से ऊपर होना चाहिए और शासन का लक्ष्य सभी तक सुविधाओं और योजनाओं का लाभ पहुंचाना होना चाहिए।

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