MP के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना, 12 अक्टूबर से साफ होगा मौसम
साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के असर से पूर्वी मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से आंधी-बारिश हो रही है। इस बार मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश दर्ज की गई। जून से सितंबर के बीच 908.4 मिमी पानी गिरा, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी है।
अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मौजूदा मौसम प्रणाली के सक्रिय रहने से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना बनी हुई है। शुक्रवार को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में अगले 24 घंटे के दौरान बारिश हो सकती है।
10 और 11 अक्टूबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और धूप निकलने की संभावना है। 12 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ हो सकता है। इस दिन कहीं भी बारिश होने का अनुमान नहीं है।
बदलते मौसम का खेती पर असर
मौसम में हो रहे बदलाव का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में खेतों को समान रूप से नमी मिलेगी।
दूसरी ओर, पश्चिमी मध्य प्रदेश में शुष्क मौसम रहने की संभावना को देखते हुए किसानों को बोवनी और सिंचाई से जुड़े फैसले स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लेने होंगे। खेत में मौजूद नमी, मिट्टी की स्थिति और सिंचाई के साधनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ जैसी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बारिश हो रही है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी महीने की शुरुआत में कहीं तेज धूप रही, तो कहीं रात के तापमान में ठंडक महसूस हुई। कई जिलों में बारिश भी दर्ज की गई। प्रदेश में इस बार मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।
पूर्वी MP में 4% ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश
इस मानसून सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 12% कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग शामिल हैं।
हालांकि, पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश दर्ज की गई।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश हुई।
इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में मानसून सीजन के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।
30 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के बाकी 30 जिलों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
कुल मिलाकर, प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी जिलों में बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि पश्चिमी हिस्से में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने पर दिन में धूप और रात में अपेक्षाकृत ठंडक का असर देखने को मिल सकता है।
