कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी
रायसेन जिले के सिलवानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया जा रहा था तभी अचानक आग भड़क उठी और एक कार्यकर्ता इसकी चपेट में आ गया। युवक के सिर और कपड़ों में आग लग गई। अचानक हुई घटना से घबराया कार्यकर्ता वहां से भागा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाई जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान उत्साह के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
इधर ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हुआ। सांसद भरत सिंह कुशवाह मशाल लेकर चल रहे थे। इसी दौरान एक उत्साहित कार्यकर्ता सेवा ज्योति को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए ऊपर चढ़ गया। जब उसे मशाल सौंपी जा रही थी तभी उसकी लौ से आग कार्यकर्ता के कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते उसकी शर्ट जलने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे आग लगने की जानकारी दी जिसके बाद युवक ने किसी तरह आग बुझाई और नीचे उतर आया। इस घटना में सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की चपेट में आने से बाल बाल बच गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
उधर रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल संबोधन ने अलग ही चर्चा पैदा कर दी। बलराम महोत्सव में उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया और उनके लिए तालियां भी बजवाईं। इसके बाद रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक कह दिया। मुख्यमंत्री की जुबान फिसलने से विधायक के चेहरे के भाव देखने लायक हो गए। कार्यक्रम में रतलाम के महापौर प्रहलाद पटेल की गैरमौजूदगी पर भी मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि महापौर किसानों के कार्यक्रम में आने के बजाय अपना मैरिज गार्डन चला रहे हैं और नगर निगम भी संभाल रहे हैं। कुछ देर बाद महापौर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके साथ आए नेता को राम लक्ष्मण कहकर संबोधित किया। उनके इस अंदाज की सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।
इसी बीच शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव बिना पूरी तैयारी के पहुंच गए और मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए। नाराजगी सामने आने पर उन्होंने जानकारी नहीं मिलने की बात कही लेकिन संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सूचना पहले ही भेजी जा चुकी थी। मामला बिगड़ता देख बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रमुख सचिव का बचाव किया और कहा कि उन्हें जानकारी नहीं मिली थी। इस तरह बैठक का माहौल संभल गया। मध्य प्रदेश में इन घटनाओं ने राजनीति के साथ प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं को हवा दे दी है।
