October 12, 2026

अभिजीत दिपके का दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप, हिरासत का पूरा वीडियो जारी करने और कानूनी अधिकारों के हनन पर मांगा जवाब

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नई दिल्ली । सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान अपने बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस से संबंधित घटनाक्रम का पूरा वीडियो सार्वजनिक करने की मांग की है। दिपके का कहना है कि हिरासत के दौरान उन्होंने कई बार अपने चचेरे भाई से बात करने, दो मिनट के लिए मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई। उनका आरोप है कि पुलिस ने घटना का केवल संपादित वीडियो जारी किया है, जबकि पूरा वीडियो सामने आने से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पत्रकारों से बातचीत में दिपके ने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस को अपनी कार्रवाई पर भरोसा है, तो उसे बिना किसी बदलाव के पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करनी चाहिए। उनके मुताबिक, इससे लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि हिरासत के दौरान उनके साथ क्या हुआ और क्या उन्हें अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि पूरी रिकॉर्डिंग जारी करने के बजाय संपादित वीडियो क्यों दिखाया जा रहा है।

दिपके ने विशेष रूप से अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की स्थिति में कानूनी सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन उन्हें अपने वकील से बात करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके माता-पिता और वकीलों को यह जानकारी नहीं दी कि उन्हें कहां रखा गया है और किस पुलिस थाने में ले जाया गया है।

दिपके के अनुसार, पुलिसकर्मी सुबह करीब 3:30 बजे गिरफ्तारी से संबंधित कागजात लेकर उनके पास पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस उनके परिवार की परिस्थितियों से परिचित थी, क्योंकि उस समय परिवार उनकी दादी के निधन के दुख से गुजर रहा था। इस स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए और कहा कि परिवार पहले ही एक बड़े सदमे का सामना कर रहा था।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि ऐसी परिस्थिति में अपने माता-पिता को गिरफ्तारी की सूचना देना कितना उचित होता, खासकर जब उन्हें लंबे समय तक जेल में रहने की आशंका बताई जा रही थी। दिपके ने कहा कि पुलिस उनसे माता-पिता से बात करने के लिए कह रही थी, लेकिन दूसरी ओर उनके परिवार को यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस थाने या जेल में रखा गया है। उन्होंने इस घटनाक्रम को अपने और अपने परिवार के लिए मानसिक प्रताड़ना बताया।

दिपके ने पुलिस की कार्रवाई में महिला अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि पुरुष पुलिस अधिकारियों पर छेड़छाड़ के आरोपों की संभावना के कारण महिला अधिकारियों को आगे किया गया हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या महिला अधिकारियों की मौजूदगी पुलिस की कार्रवाई का बचाव करने के उद्देश्य से थी। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने आशंका व्यक्त की है और किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि पुलिस को महिला अधिकारियों को आगे रखने के कारण स्पष्ट करने चाहिए। दिपके ने महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की बात करते हुए कहा कि वह और उनके सहयोगी सभ्य तथा शिक्षित लोग हैं और महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आना जानते हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस से पूरे वीडियो को सार्वजनिक करने और हिरासत से जुड़े घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग दोहराई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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