March 18, 2026

हर सुबह अलार्म से उठना कर सकता है नुकसान, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

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नई दिल्ली : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सुबह समय पर उठने के लिए अलार्म लगाना एक आम आदत बन चुकी है। ज्यादातर लोग मोबाइल या घड़ी में अलार्म सेट करके सोते हैं, ताकि उनकी दिनचर्या समय पर शुरू हो सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी आदत आपकी सेहत, खासकर दिल और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हमारा शरीर एक प्राकृतिक सिस्टम यानी Circadian Rhythm पर काम करता है, जिसे आम भाषा में बॉडी क्लॉक कहा जाता है। यह सिस्टम सूरज के उगने और ढलने के अनुसार हमारे सोने और जागने के समय को नियंत्रित करता है। जब हम इस प्राकृतिक प्रक्रिया को नजरअंदाज कर अलार्म के जरिए अचानक जागते हैं, तो शरीर को झटका लगता है।

अलार्म की तेज आवाज नींद के गहरे चरण को अचानक तोड़ देती है, जिससे Sleep Inertia नाम की स्थिति पैदा होती है। इस अवस्था में व्यक्ति जाग तो जाता है, लेकिन उसका दिमाग पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाता। यही कारण है कि कई लोग सुबह उठने के बाद भी थकान, सुस्ती और भ्रम महसूस करते हैं।

सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब अलार्म की आवाज शरीर में Fight or Flight Response को सक्रिय कर देती है। यह वही प्रतिक्रिया है, जो किसी खतरे की स्थिति में शरीर में होती है। अचानक तेज आवाज से शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट तेजी से बढ़ते हैं। अगर यह प्रक्रिया रोज होती है, तो लंबे समय में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

नींद केवल शरीर को आराम देने के लिए नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी होती है। जब अलार्म बार-बार नींद को बाधित करता है, तो यह आपके मूड और इमोशनल हेल्थ को भी प्रभावित करता है। सुबह की शुरुआत अगर घबराहट और तनाव के साथ होती है, तो इसका असर पूरे दिन पर पड़ता है। व्यक्ति चिड़चिड़ा, चिंतित और थका हुआ महसूस कर सकता है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अलार्म पूरी तरह से खतरनाक है, लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल जरूर नुकसानदायक हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोगों को धीरे-धीरे अपनी लाइफस्टाइल को इस तरह ढालना चाहिए कि वे बिना अलार्म के स्वाभाविक रूप से जाग सकें।

इसके लिए सबसे जरूरी है एक निश्चित स्लीप रूटीन अपनाना। रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, ताकि आपकी बॉडी क्लॉक खुद सेट हो सके। सोने से पहले मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और रिलैक्सिंग गतिविधियां जैसे किताब पढ़ना, हल्का योग या ध्यान करें।

सुबह की प्राकृतिक रोशनी भी शरीर को जगाने में अहम भूमिका निभाती है। अगर आप अपने कमरे में हल्की रोशनी आने देते हैं, तो शरीर खुद ही जागने के संकेत देने लगता है। इसके अलावा, रोज 7 से 9 घंटे की पर्याप्त नींद लेना भी बेहद जरूरी है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि अलार्म की आदत को पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे बदलाव करके आप अपने शरीर को प्राकृतिक तरीके से जगने के लिए तैयार कर सकते हैं। यह न केवल आपकी नींद को बेहतर बनाएगा, बल्कि आपके दिल और मानसिक स्वास्थ्य को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखेगा।

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