शहडोल के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं, दो नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल
गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए दूर दराज के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ग्रामीणों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े बड़े दावे करती है लेकिन निपनिया अस्पताल की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। अस्पताल के कर्मचारी भी इस अव्यवस्था से परेशान हैं और डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है।
डॉ राजेश मिश्रा ने बताया कि डॉक्टरों का बॉन्ड पीरियड खत्म होने के कारण अस्पताल में खालीपन है। इसके अलावा जिले में पीजी के लिए लगभग 10 डॉक्टर अन्य कार्यों में गए हुए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए शासन से मांग की गई है और जल्द ही स्थिति सुधारी जाएगी।
यह मामला शहडोल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाता है और दिखाता है कि चमचमाती बिल्डिंगों के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी अव्यवस्थित रह सकती है।
