March 20, 2026

शहडोल में सरकारी मशीनरी का अवैध इस्तेमाल: कोयला खदान से मिट्टी चोरी कर रेलवे निर्माण में लगाया गया, नगर परिषद उपाध्यक्ष पर गंभीर आरोप

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शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के अमलाई क्षेत्र से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अवैध उत्खनन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। नगर परिषद बरगवां-अमलाई के उपाध्यक्ष राज तिवारी पर आरोप है कि उनके संरक्षण में कोल इंडिया की प्रतिबंधित खदान से ओवरबर्डन यानी मिट्टी चोरी कर अमलाई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म निर्माण में खपाई जा रही थी।

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस पूरी अवैध गतिविधि में नगर परिषद की जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया गया। सूत्रों के अनुसार मशीन बिना किसी आधिकारिक आदेश या सीएमओ की अनुमति के खदान क्षेत्र में खुदाई कर रही थी। इसे छिपाने के लिए जेसीबी चालक को मरी हुई गाय को दफनाने का झांसा देकर मौके पर बुलाया गया लेकिन असल में वहां से मिट्टी ट्रैक्टरों के जरिए रेलवे स्टेशन तक भेजी जा रही थी।

स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि पिछले दो दिनों में लगभग 40 से 50 ट्रैक्टर मिट्टी रेलवे परिसर में डाली जा चुकी है। बताया गया है कि अमलाई स्टेशन पर प्लेटफॉर्म निर्माण के लिए करीब 8 से 10 लाख रुपये का मिट्टी भराई का ठेका दिया गया था। रेलवे के इंजीनियर और ठेकेदार भी मानते हैं कि मिट्टी राज तिवारी के माध्यम से मंगवाई जा रही थी हालांकि वे इसके अवैध स्रोत से अनजान थे।

मामला उजागर होने पर कोल इंडिया सुहागपुर एरिया के अधिकारियों ने सर्वे दल के साथ मौके का मुआयना किया और पुष्टि की कि उत्खनन उनकी भूमि पर हो रहा था। इसके बाद अमलाई उप क्षेत्रीय प्रबंधक पी. रमन्ना और सुरक्षा अधिकारियों ने देवहरा पुलिस चौकी में लिखित शिकायत सौंपी है।

राज तिवारी जो एक संपन्न और रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं पर लगे आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रेलवे के मुख्य अभियंता अरविंद ने स्पष्ट किया है कि यदि मिट्टी चोरी की पुष्टि होती है तो संबंधित निर्माण कंपनी का ठेका निरस्त कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

देवहरा पुलिस फिलहाल इस मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित सिंडिकेट में और कौन-कौन से अधिकारी या रसूखदार शामिल हैं। मामला केवल अवैध उत्खनन तक सीमित नहीं है बल्कि यह सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और उच्च स्तरीय संरक्षण का गंभीर उदाहरण भी माना जा रहा है।

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