May 31, 2026

नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..

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नई दिल्ली:शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का तीसरा दिन इस बार और भी खास बन गया है क्योंकि इसी दिन तृतीया तिथि पर प्रसिद्ध पर्व गणगौर भी मनाया जा रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

गणगौर का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से है। इस दिन शिवजी को ईसर और माता पार्वती को गौरा या गवरजा के रूप में पूजा जाता है। गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ माता पार्वती होता है। यह पर्व विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र सहित कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और विवाहित महिलाओं को सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं पूरे मनोभाव से व्रत रखकर माता गौरा की पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 33 मिनट पर होगा। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगी। नक्षत्र अश्विनी दिनभर रहेगा और यह 22 मार्च की देर रात तक प्रभावी रहेगा। वहीं, योग इन्द्र शाम 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा और करण तैतिल दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 32 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उत्तम समय माना जाता है। अमृत काल शाम 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

हालांकि, कुछ समय ऐसे भी होते हैं जिनमें शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इस दिन राहुकाल सुबह 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 31 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इन समयों में कोई भी नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ नहीं माना जाता।

नवरात्र का यह तीसरा दिन आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां मां गौरा और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है, वहीं दूसरी ओर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का पालन कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह दिन भक्ति, आस्था और संस्कारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

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