October 12, 2026

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट! मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद का असर

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नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब युद्धविराम की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार को राहत दी है। रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की श्रेणी में वर्गीकरण दर्ज किया गया, जिससे निवेशकों और आयातक देशों को बड़ी राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड भी 7 प्रतिशत से अधिक अनुपात 97.18 डॉलर प्रति शेयर के करीब इंट्राडे तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 6 प्रतिशत से अधिक मार्जिन 86.72 डॉलर प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि यह स्तर केवल तकनीकी नहीं बल्कि भू-राजनीतिक अध्ययन का है, जहां अब सीजफायर को बाजार में शामिल किया जा रहा है। पिछले हफ्ते जहां तेल 100 डॉलर के पार पहुंच गया था, वहीं अब इसमें तेज करेक्शन देखने को मिला है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी से बदलाव की स्थिति पर प्रतिक्रिया दे रही है।

भारत को राहत, बेरोजगारी और ब्याज पर असर
कच्चे तेल की कीमत में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा फायदा भारत को सबसे बड़ा फायदा होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति डॉलर की कमी भारत के चालू खाते में 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। साथ ही रेस्टॉरेंट का सीधा असर यह होता है कि ग्राहक मूल्य में 20 से 30 बेसिस पॉइंट तक की राहत मिल सकती है। किशोरों से भारत का अधिकार बिल घटेगा, जिससे रुपयों पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था स्थिर रहेगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यह राहत में तेजी आ सकती है, क्योंकि अगर पश्चिम एशिया में फिर से गिरावट आती है तो जिले में नाममात्र की तेजी हो सकती है।

टेक्नोलॉजी स्नातक पर रूक मार्केट, आगे कैसी रहेगी चाल
मानको के अनुसार, कच्चे तेल की परतें अहम् तकनीकी स्तर के आसपास बनी हुई हैं। अमेरिकी कच्चा तेल 85 से 87 डॉलर का समर्थन जोन में है, जो बाजार की दिशा तय करेगा। यदि प्रतिस्पर्धी 92 से 94 डॉलर तक पहुंच सकते हैं, तो फिर से तेजी का नया दौर शुरू हो सकता है और 98 से 100 डॉलर तक पहुंच सकते हैं। दूसरी ओर, यदि यह 85 डॉलर से नीचे टूटता है, तो मूल्य 81 से 82 डॉलर तक गिर सकता है। ऐसे में अर्जियों के लिए ‘गिरावट में खरीदारी’ की रणनीति उद्यम मनी जा रही है, लेकिन जोखिम को मंजूरी नहीं दी जा सकती है।

वैश्विक उद्यम में मिला-जुला रुख, वृश्चिक की झलकियाँ पर
तेल की बिक्री में गिरावट का असर वैश्विक शेयरों पर भी देखने को मिला। जहां अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी से गिरावट दर्ज की गई और एसएंडपी 500 और नैस्डैक नीचे बंद हो गए, वहीं एशियाई शेयर बाजारों में तेजी से देखने को मिला। जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग सभी प्रमुख स्टोर्स के साथ बंद हो गए। यह संकेत देता है कि निवेशकों को राहत देने की खबरें भरोसेमंद लोगों पर हैं, लेकिन पूरी तरह से गलत धारणाएं नहीं हैं। बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, वैश्विक मांग और बाजारों की स्थिति और बड़े देशों के उद्यमों पर टिकी हुई है।

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