May 29, 2026

ISI की बड़ी साजिश का खुलासा, भारत में दहशत फैलाने की थी योजना, जानिए जांच में क्‍या हुए खुलासे

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नई दिल्ली।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें भारत में बड़े पैमाने पर दहशत फैलाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आतंकी मॉड्यूल को दिल्ली सहित देश के किसी एक स्थान पर 100 से अधिक राउंड गोलियां चलाने का निर्देश दिया गया था, ताकि भय का माहौल पैदा किया जा सके।

जांच में हुए ये खुलासे
जांच में सामने आया है कि अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला मुख्य आरोपी शाहबाज अंसारी बांग्लादेश में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसका पारिवारिक बैकग्राउंड भी हथियार तस्करी से जुड़ा रहा है। इस मॉड्यूल के जरिए आईएसआई का उद्देश्य भारत में अशांति और डर फैलाना था।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों को निशाना बनाने का टारगेट दिया गया था। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि शाहबाज का भाई दुबई में आईएसआई अधिकारियों के संपर्क में आया, जिसके बाद इस नेटवर्क की कड़ियां मजबूत हुईं। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर भारत में हथियार भेजे जा रहे थे।

डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, आरोपी इमरान और कामरान इस अवैध हथियार सप्लाई मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य थे और शाहबाज अंसारी के निर्देश पर काम कर रहे थे। दोनों नेपाल जाकर हथियारों की खेप लाते थे, जिन्हें सीमा पार गुप्त रास्तों से भारत में पहुंचाया जाता था। पुलिस से बचने के लिए हथियारों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर लाया जाता था और फिर सुरक्षित ट्रांजिट पॉइंट्स के जरिए सप्लाई किया जाता था।

दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों का कारोबार
जांच में यह भी सामने आया कि इमरान, जो उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद का रहने वाला है, अपने भाई के साथ दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों के कारोबार को अंजाम दे रहा था। वहीं कामरान, जो बुलंदशहर में चूड़ी की दुकान पर काम करता था, इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। दोनों ही आरोपी शाहबाज अंसारी के करीबी रिश्तेदार हैं और उसके निर्देशों का पालन करते थे।

नेटवर्क की अहम कड़ी था शाहबाज अंसारी
पुलिस के अनुसार, फरार शाहबाज अंसारी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी था, जो विदेश में बैठे आकाओं और भारत-नेपाल-पाकिस्तान में काम कर रहे गुर्गों के बीच समन्वय स्थापित करता था। हथियारों की तस्करी का रूट भी बेहद सुनियोजित था—पहले पाकिस्तान से खरीद, फिर थाईलैंड के रास्ते नेपाल भेजना और अंत में भारत में अवैध रूप से पहुंचाना।

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